दंतेवाड़ा में वन्यजीव शिकार का भंडाफोड़, 9 भारतीय विशाल गिलहरियों के शिकारी गिरफ्तार

उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व, राज्य उड़नदस्ता और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई में 9 भारतीय विशाल गिलहरियों के शिकार के मामले में आरोपी गिरफ्तार किया गया। आरोपी के पास से भालू की खाल और शिकार के उपकरण भी बरामद हुए।

Apr 8, 2026 - 18:42
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दंतेवाड़ा में वन्यजीव शिकार का भंडाफोड़, 9 भारतीय विशाल गिलहरियों के शिकारी गिरफ्तार

UNITED NEWS OF ASIA. रिजवान मेमन, धमतरी।  छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जहां संयुक्त टीम ने भारतीय विशाल गिलहरियों के शिकार के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई उदंती सीता नदी टाइगर रिजर्व (USTR), राज्य स्तरीय उड़नदस्ता और दंतेवाड़ा वन प्रमंडल की टीम द्वारा संयुक्त रूप से की गई।

मामले की शुरुआत एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर वायरल हुए वीडियो से हुई, जिसमें दो व्यक्तियों को नौ भारतीय विशाल गिलहरियों के साथ दिखाया गया था। इस वीडियो ने वन विभाग को सतर्क कर दिया। वीडियो में दिख रही गिलहरियां ‘रतुफा इंडिका’ प्रजाति की थीं, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अनुसूची-I में संरक्षित हैं और अत्यंत महत्वपूर्ण प्रजातियों में गिनी जाती हैं।

वीडियो की गहन जांच और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई और उनके संभावित स्थान का पता लगाया गया। इसके बाद संयुक्त टीम ने 8 अप्रैल 2026 को दंतेवाड़ा जिले के बारसूर क्षेत्र में दबिश देकर मुख्य आरोपी बंशीराम कोवासी को गिरफ्तार कर लिया।

तलाशी के दौरान आरोपी के घर से एक स्लॉथ बियर (भालू) की खाल और जानवरों को फंसाने वाले फंदे (स्नेयर्स) भी बरामद किए गए, जो इस बात का संकेत हैं कि आरोपी लंबे समय से अवैध शिकार गतिविधियों में संलिप्त था। प्रारंभिक पूछताछ में यह सामने आया है कि आरोपी ने इन गिलहरियों का शिकार जंगली मांस (बुश मीट) के सेवन के उद्देश्य से किया था।

वन विभाग के अनुसार, इस मामले में अन्य आरोपी भी शामिल हैं, जो फिलहाल फरार हैं। उनकी तलाश जारी है और उन्हें निगरानी में रखा गया है। इस कार्रवाई में गरियाबंद पुलिस से प्राप्त सूचनाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारतीय विशाल गिलहरी न केवल जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वन पारिस्थितिकी तंत्र में ‘बीज प्रसारक’ के रूप में अहम भूमिका निभाती है। यह पेड़ों के बीजों को फैलाकर जंगलों के पुनर्जनन में मदद करती है। साथ ही, इसे ‘सूचक प्रजाति’ भी माना जाता है, जिसकी उपस्थिति स्वस्थ और घने जंगलों का संकेत देती है।

वन विभाग ने इस कार्रवाई के माध्यम से अवैध वन्यजीव व्यापार और शिकार के खिलाफ अपनी सख्त नीति को दोहराया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही आम जनता से भी अपील की गई है कि यदि कहीं वन्यजीवों के अवैध शिकार या व्यापार की जानकारी मिले, तो तुरंत संबंधित विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।

यह कार्रवाई न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि पर्यावरण और जैव विविधता के संरक्षण के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क और प्रतिबद्ध है।