दंतेवाड़ा में जलप्रदाय योजना ठप, 8 गांवों में गहराया पेयजल संकट

दंतेवाड़ा के बचेली-नेरली क्षेत्र में ग्रामीण समूह जलप्रदाय योजना बंद होने से 8 गांवों के लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने और जलस्रोत दूषित होने से आपूर्ति ठप है।

Apr 8, 2026 - 13:06
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दंतेवाड़ा में जलप्रदाय योजना ठप, 8 गांवों में गहराया पेयजल संकट

UNITED NEWS OF ASIA. नवीन चौधरी, दंतेवाड़ा । छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के बचेली-नेरली क्षेत्र में एक बार फिर पेयजल संकट गहराता जा रहा है। शासन की महत्वाकांक्षी ग्रामीण समूह जलप्रदाय योजना पूरी तरह ठप पड़ गई है, जिसके कारण लगभग 8 गांवों के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। गर्मी के इस मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो गई है, जिससे लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2016-17 में इस योजना के तहत फिल्टर प्लांट और पंप हाउस का निर्माण किया गया था। इसका उद्देश्य समलवार, पीनाबचेली, पालनार, नेरली, कलेपाल सहित आसपास के गांवों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था। शुरुआत में कुछ समय तक व्यवस्था सुचारू रूप से चली, लेकिन वर्तमान में यह पूरी प्रणाली बंद पड़ी है।

सूत्रों के मुताबिक, एलएंडटी कंपनी द्वारा एनएमडीसी परियोजना के लिए पाइपलाइन बिछाने के दौरान जलस्रोत प्रभावित हो गया। नाले के पानी में अत्यधिक मिट्टी और गाद मिल जाने से पानी दूषित हो गया, जिससे फिल्टर प्लांट तक पहुंचने वाला पानी उपयोग के योग्य नहीं रह गया। इस कारण पंप हाउस को बंद करना पड़ा।

इसके अलावा रेलवे लाइन के दोहरीकरण कार्य ने भी समस्या को और बढ़ा दिया है। कई स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे जल आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। नेरली और पीनाबचेली क्षेत्र में जहां पहले पानी की आपूर्ति होती थी, वहां पिछले करीब छह महीनों से पूरी तरह जल संकट बना हुआ है।

कुछ गांवों में पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन आज तक नियमित जल आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। ग्रामीण आज भी कुओं, चुआ और पारंपरिक जलस्रोतों पर निर्भर हैं। भीषण गर्मी में ये स्रोत भी सूखने लगे हैं, जिससे लोगों को गंदा और असुरक्षित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।

ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द फिल्टर प्लांट और पंप हाउस को चालू किया जाए तथा क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत कर नियमित जल आपूर्ति बहाल की जाए।

इस मामले में अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान फिल्टर प्लांट को बंद कर नए प्लांट के लिए टेंडर जारी किया जाएगा और नई व्यवस्था स्थापित की जाएगी। हालांकि इस निर्णय पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहले सही तकनीकी जांच और निगरानी की जाती, तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती।

फिलहाल तकनीकी खामियों और जिम्मेदारी तय करने को लेकर स्पष्ट जवाब सामने नहीं आ रहा है। अधिकारी उच्च स्तर पर चर्चा की बात कहकर मामले से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।

यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह जल संकट और भी विकराल रूप ले सकता है। ऐसे में ग्रामीणों की उम्मीद अब प्रशासन की त्वरित कार्रवाई पर टिकी हुई है, ताकि उन्हें जल्द राहत मिल सके।