गन्ना और उद्यानिकी फसलों को भी कृषक उन्नति योजना में शामिल करे सरकार: चोवाराम साहू
कवर्धा में किसान प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ साहू संघ के अध्यक्ष एवं पूर्व उपाध्यक्ष कवर्धा कृषि उपज मंडी चोवाराम साहू ने प्रदेश सरकार से गन्ना और उद्यानिकी फसलों को कृषक उन्नति योजना में शामिल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन फसलों को योजना के दायरे में लाने से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने किसान हित में सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की है।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l किसान प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ साहू संघ के अध्यक्ष एवं पूर्व उपाध्यक्ष कवर्धा कृषि उपज मंडी चोवाराम साहू ने प्रदेश सरकार से गन्ना और उद्यानिकी फसलों को भी कृषक उन्नति योजना के दायरे में शामिल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को योजना का लाभ मिलने से फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है।
चोवाराम साहू ने जारी बयान में कहा कि प्रदेश में लगातार बढ़ रहे धान के उत्पादन और अन्य फसलों की ओर किसानों के घटते रुझान को देखते हुए संतुलित कृषि को बढ़ावा देना जरूरी है। इसी उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा कृषक उन्नति योजना शुरू की गई है। योजना के तहत धान के स्थान पर दलहन और तिलहन फसल लेने वाले किसानों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ देने का प्रावधान किया गया है।
चोवाराम साहू के अनुसार वर्तमान में गन्ना और उद्यानिकी फसलों को इस योजना के दायरे में शामिल नहीं किया गया है। इसके कारण इन फसलों की खेती करने वाले किसानों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि कृषि क्षेत्र में विविधता को बढ़ावा देने के लिए गन्ना और उद्यानिकी फसलों को भी योजना में शामिल किया जाए।
उन्होंने कहा कि कबीरधाम जिला प्रदेश के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। जिले में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। इसके अलावा प्रदेश के अन्य जिलों में भी गन्ने का उत्पादन किया जाता है। ऐसे में गन्ना उत्पादक किसानों को भी कृषक उन्नति योजना का लाभ मिलना चाहिए, ताकि उन्हें बेहतर आर्थिक प्रोत्साहन मिल सके और वे कृषि में विविधता को अपनाने के लिए प्रोत्साहित हों।
चोवाराम साहू ने बताया कि कबीरधाम जिले में किसान गन्ने के साथ-साथ विभिन्न प्रकार की उद्यानिकी फसलों का भी बड़े स्तर पर उत्पादन कर रहे हैं। जिले में केला, पपीता, शिमला मिर्च सहित कई अन्य उद्यानिकी फसलों की खेती की जा रही है। इन फसलों से किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलते हैं, लेकिन योजना का लाभ नहीं मिलने के कारण इन फसलों को लेकर किसानों को अपेक्षित प्रोत्साहन नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार गन्ना और उद्यानिकी फसलों को कृषक उन्नति योजना में शामिल करती है तो किसानों का इन फसलों की ओर रुझान बढ़ सकता है। इससे कृषि क्षेत्र में फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसान केवल धान की खेती पर निर्भर रहने के बजाय अलग-अलग फसलों की खेती के लिए आगे आएंगे। इससे कृषि उत्पादन में संतुलन बनाने के साथ किसानों की आय के नए स्रोत भी विकसित हो सकते हैं।
चोवाराम साहू ने कहा कि फसल विविधीकरण किसानों और कृषि क्षेत्र दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। अलग-अलग फसलों की खेती को प्रोत्साहन मिलने से किसानों को बाजार की मांग के अनुसार फसल चयन करने का अवसर मिलेगा। साथ ही उद्यानिकी और गन्ना जैसी फसलों को आर्थिक प्रोत्साहन मिलने से कृषि क्षेत्र में नए विकल्प मजबूत हो सकते हैं।
उन्होंने प्रदेश सरकार से किसान हित में जल्द निर्णय लेने की मांग करते हुए कहा कि गन्ना एवं उद्यानिकी फसल लेने वाले किसानों को भी कृषक उन्नति योजना का लाभ दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि इससे किसानों को आर्थिक रूप से मजबूती मिलेगी और प्रदेश में फसल विविधीकरण की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।