समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा और शिक्षकों की भूमिका लगातार व्यापक हो रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों का नई तकनीकों से परिचित होना जरूरी है, लेकिन तकनीक का विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और मानवीय मूल्यों के अनुरूप उपयोग उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि AI को सहायक के रूप में उपयोग किया जाना चाहिए, नियंत्रक के रूप में नहीं। शिक्षकों को विद्यार्थियों को तकनीक के माध्यम से ज्ञान अर्जित करने, नवाचार करने और अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने सूचनाओं की उपलब्धता को बेहद आसान बना दिया है, लेकिन अत्यधिक तकनीकी निर्भरता स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रभावित कर सकती है। तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन, प्रेरणा और जीवन की सही दिशा शिक्षक ही प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही विषय और करियर चुनने में मार्गदर्शन देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय में विद्यार्थियों की काउंसलिंग और व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षक की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक सम्मान उनके समर्पण, परिश्रम, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान है। मुख्यमंत्री ने डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का स्मरण करते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा परंपरा में ज्ञान के साथ संस्कार, जिम्मेदारी और बेहतर नागरिक निर्माण को महत्व दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शैक्षणिक अवसर पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उनके अनुसार युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बस्तर क्षेत्र में स्थानीय बोली के माध्यम से प्रारंभिक शिक्षा, पैरेंट्स-टीचर मीट और आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों के विस्तार जैसी पहलों का भी उल्लेख किया गया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन पीएम श्री योजना के अंतर्गत किया गया है। इसके साथ ही स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 विद्यालय प्रारंभ किए जा रहे हैं। बस्तर के ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शिक्षा और शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है। AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित करने के साथ विद्यार्थियों में रचनात्मकता, अच्छे संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
समारोह में खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के राजेश कुमार प्रजापति, कोरबा के कामता प्रसाद जायसवाल, दुर्ग की प्रज्ञा सिंह और सारंगढ़-बिलाईगढ़ की प्रियंका गोस्वामी को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अलावा प्रधान पाठक, व्याख्याता, शिक्षक और सहायक शिक्षक सहित विभिन्न संवर्गों के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। समारोह में स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी सहित विभागीय अधिकारी, शिक्षक-शिक्षिकाएं और अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।