छत्तीसगढ़ में धान की खेती के तकनीकी सत्यापन के लिए हुआ एमओयू, उपार्जन व्यवस्था होगी और पारदर्शी
छत्तीसगढ़ में धान की खेती के वास्तविक रकबे का सटीक और तकनीक आधारित आकलन करने के लिए खाद्य विभाग और छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के बीच समझौता ज्ञापन हुआ। इसके तहत सेटेलाइट मैपिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे और भू-स्थानिक डेटा का उपयोग किया जाएगा। वन अधिकार अधिनियम और डुबान क्षेत्रों में डिजिटल रूप से मैप नहीं हुए कृषि क्षेत्रों की पहचान कर जीआईएस आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी। इससे धान उपार्जन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान की खेती के क्षेत्रफल का सटीक, पारदर्शी और तकनीक आधारित आकलन करने की दिशा में राज्य शासन ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रालय महानदी भवन में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू का उद्देश्य सेटेलाइट आधारित मैपिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे और भू-स्थानिक डेटा के बेहतर समन्वय के माध्यम से धान उपार्जन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुदृढ़ बनाना है।