विश्व स्तनपान सप्ताह पर छत्तीसगढ़ के पहले मातृ दूध कोष की घोषणा, मातृ दुग्ध दान को मिला नया आयाम

विश्व स्तनपान सप्ताह के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के पहले "मातृ दूध कोष (Human Milk Bank)" की घोषणा की गई। कार्यक्रम में मातृ दुग्ध दान करने वाली 10 माताओं को "माता यशोदा सम्मान" से सम्मानित किया गया। विशेषज्ञों ने स्तनपान को नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और कुपोषण मुक्त समाज की मजबूत नींव बताया।

Aug 7, 2026 - 14:31
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विश्व स्तनपान सप्ताह पर छत्तीसगढ़ के पहले मातृ दूध कोष की घोषणा, मातृ दुग्ध दान को मिला नया आयाम

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रदेश के पहले "मातृ दूध कोष (Human Milk Bank)" की स्थापना की घोषणा की। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) और राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (SHSRC) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्तनपान के महत्व के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना, नवजात शिशुओं के बेहतर पोषण को सुनिश्चित करना और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाना था।

कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण "माता यशोदा सम्मान" रहा। इस सम्मान के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों से चयनित 10 माताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने मातृ दुग्ध का दान कर उन नवजात शिशुओं को जीवनदायी सहयोग दिया, जिन्हें किसी कारणवश अपनी मां का दूध उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। इस पहल के माध्यम से समाज में मातृ दुग्ध दान के महत्व को रेखांकित करते हुए इसे जनभागीदारी से जुड़े सामाजिक अभियान का स्वरूप देने का संदेश दिया गया।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि मां का दूध शिशु के लिए सबसे सुरक्षित, पौष्टिक और संपूर्ण आहार है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज की मजबूत नींव जीवन के शुरुआती दिनों में मिलने वाले उचित पोषण से ही रखी जाती है। उन्होंने मितानिन कार्यक्रम के 25 वर्षों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश की हजारों मितानिन कार्यकर्ता दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं तथा नवजात शिशुओं तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने उन्हें सेवा और समर्पण की मिसाल बताते हुए समाज की सच्ची प्रेरणा बताया।

कार्यक्रम के दौरान प्रदेश के पहले मातृ दूध कोष की स्थापना को नवजात शिशुओं के लिए ऐतिहासिक और जीवनरक्षक पहल बताया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि जिन नवजात शिशुओं को किसी कारणवश अपनी मां का दूध उपलब्ध नहीं हो पाता, उनके लिए सुरक्षित रूप से संग्रहित मातृ दुग्ध अमृत के समान होता है। इस सुविधा से समय से पहले जन्मे, कमजोर और गंभीर रूप से बीमार शिशुओं को बेहतर पोषण और संक्रमण से सुरक्षा मिल सकेगी।

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया ने कहा कि जन्म के पहले घंटे में स्तनपान शुरू करना, छह माह तक केवल मां का दूध पिलाना और माताओं को पर्याप्त पोषण उपलब्ध कराना स्वस्थ एवं कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने समाज में स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने, प्रत्येक मां को सही परामर्श और सहयोग उपलब्ध कराने तथा स्तनपान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आयुष विश्वविद्यालय, चिकित्सा शिक्षा संस्थानों और विभिन्न स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि मातृ दूध कोष की स्थापना, मातृ दुग्ध दान को बढ़ावा और मितानिन नेटवर्क की सक्रिय भागीदारी से प्रदेश में नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य और पोषण में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह पहल न केवल शिशु मृत्यु दर को कम करने में सहायक होगी, बल्कि स्वस्थ, सुरक्षित और कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।