बाल विवाह के खिलाफ छत्तीसगढ़ की मुहिम को वैश्विक संकल्प से मिली नई ताकत

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किए जाने से छत्तीसगढ़ में चल रहे बाल विवाह रोकथाम अभियानों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। राज्य में बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों को लेकर शासन, प्रशासन, पुलिस, पंचायतों, स्कूलों और सामाजिक संगठनों के समन्वय से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

Sep 7, 2026 - 08:33
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बाल विवाह के खिलाफ छत्तीसगढ़ की मुहिम को वैश्विक संकल्प से मिली नई ताकत

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ छत्तीसगढ़ में चलाए जा रहे जागरूकता और रोकथाम के प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र की पहल से नई ताकत मिलने की उम्मीद है। संयुक्त राष्ट्र ने 27 नवंबर को बाल विवाह, कम उम्र और जबरन विवाह के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किया है। इस वैश्विक संकल्प से बाल विवाह के खिलाफ भारत और छत्तीसगढ़ में लंबे समय से चलाए जा रहे अभियानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की संभावना है।

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों को प्राथमिकता देते हुए बाल विवाह की रोकथाम के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा जिला और मैदानी स्तर पर जागरूकता, निगरानी तथा रोकथाम से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। बाल विवाह की सूचना मिलने पर समय रहते कार्रवाई करने और बच्चों को संरक्षण उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

राज्य में बाल विवाह रोकथाम के लिए शासन और प्रशासन के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस, पंचायतों, स्कूलों तथा सामाजिक संगठनों को भी अभियान से जोड़ा गया है। समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के साथ बालिकाओं को शिक्षा जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों, महिलाओं, धर्मगुरुओं और स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले लोगों की भागीदारी से बाल विवाह के खिलाफ सामाजिक वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में 18 वर्ष से कम उम्र में विवाह करने वाली लड़कियों का प्रतिशत भी कम हुआ है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 में यह आंकड़ा 12.1 प्रतिशत बताया गया था, जो राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 में घटकर 10.1 प्रतिशत रह गया। यह कमी बाल विवाह रोकथाम के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रयासों के सकारात्मक प्रभाव की ओर संकेत करती है।

राज्य में सामाजिक संगठनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही है। जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन और उसके सहयोगी संगठनों द्वारा पिछले तीन वर्षों में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में बाल विवाह रोकने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आठ सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर 8,414 बाल विवाह रुकवाए गए हैं। यह आंकड़ा जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत 27 नवंबर 2024 को देशभर में व्यापक जनभागीदारी देखने को मिली थी। इस दौरान करोड़ों लोगों ने बाल विवाह के खिलाफ शपथ लेकर सामाजिक कुरीति को समाप्त करने का संकल्प लिया था। अब 27 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किए जाने से इस विषय पर वैश्विक स्तर पर जागरूकता और सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

छत्तीसगढ़ सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक बालिका को शिक्षा, सुरक्षा और विकास के समान अवसर मिलें और किसी भी बच्ची का कम उम्र में विवाह न हो। इसके लिए बाल संरक्षण तंत्र को मजबूत करने के साथ समाज की सक्रिय भागीदारी जरूरी मानी जा रही है। संयुक्त राष्ट्र का यह वैश्विक संकल्प बाल विवाह के खिलाफ चल रहे प्रयासों को व्यापक मंच प्रदान कर सकता है। राज्य में शासन, प्रशासन और सामाजिक संगठनों के संयुक्त प्रयास 2030 तक बाल विवाह समाप्त करने के वैश्विक लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।