भाजपा की तालिबानी मानसिकता ही युवाओं को दिमागी नक्सली बता रही : कांग्रेस

कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने भाजपा सांसद संतोष पांडे और मंत्री केदार कश्यप द्वारा कांग्रेस को नक्सली समर्थक बताए जाने पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों और बेहतर भविष्य की मांग करने वाले युवाओं को नक्सली कहना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। कांग्रेस ने युवाओं के शांतिपूर्ण आंदोलनों को गांधीवादी बताते हुए भाजपा पर असहमति की आवाज दबाने का आरोप लगाया।

Aug 21, 2026 - 10:57
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भाजपा की तालिबानी मानसिकता ही युवाओं को दिमागी नक्सली बता रही : कांग्रेस

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l कांग्रेस ने भाजपा सांसद संतोष पांडे और मंत्री केदार कश्यप द्वारा कांग्रेस को नक्सली समर्थक बताए जाने पर कड़ा विरोध जताया है। कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने आरोप लगाया कि भाजपा अपने विरोध में उठने वाली आवाजों को स्वीकार नहीं कर पा रही है और असहमति रखने वाले लोगों को नक्सली समर्थक बताने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों पर सवाल उठाना और अपनी मांगों के लिए आवाज उठाना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि देश के युवा बेहतर भविष्य, रोजगार और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनके अनुसार युवाओं के आंदोलन शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनों के दौरान युवाओं को कई कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, इसके बावजूद उन्होंने हिंसा का रास्ता नहीं अपनाया। ऐसे में युवाओं को नक्सली मानसिकता से जोड़ना पूरी तरह अनुचित है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और भाजपा नेतृत्व को लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति के महत्व को समझना चाहिए। सरकार की नीतियों से सहमत होना नागरिकों के लिए अनिवार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब नागरिक सरकार की नीतियों के समर्थन में होते हैं तो उन्हें लोकतांत्रिक माना जाता है, लेकिन जब वही लोग सरकार की विफलताओं पर सवाल उठाते हैं तो उन्हें अलग-अलग आरोपों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क, महंगाई, रोजगार और बढ़ती असमानता जैसे वास्तविक मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार के पास इन मुद्दों पर ठोस जवाब नहीं होते, तब राजनीतिक बहस को दूसरी दिशा में ले जाने के लिए नक्सली, अर्बन नक्सल और टुकड़े-टुकड़े गैंग जैसे आरोप लगाए जाते हैं।

सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि अपने हक और अधिकार की मांग करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। युवाओं द्वारा बेहतर परीक्षा व्यवस्था और भविष्य की मांग को नक्सली विचारधारा से जोड़ना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा कितनी भी आपत्ति जताए, कांग्रेस युवाओं को नक्सली बताए जाने का विरोध करती रहेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं की आवाज सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। उनके अनुसार लोकतंत्र में असहमति को दबाने के बजाय संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।