बस्तर में स्वास्थ्य क्रांति: 10 दिनों में 6.39 लाख लोगों की स्क्रीनिंग, दूरस्थ इलाकों तक पहुंचीं मेडिकल टीमें

बस्तर संभाग में चल रहे मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के तहत 10 दिनों में 6.39 लाख से अधिक लोगों की जांच की गई। मोबाइल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों तक चिकित्सा सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं।

Apr 23, 2026 - 18:38
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बस्तर में स्वास्थ्य क्रांति: 10 दिनों में 6.39 लाख लोगों की स्क्रीनिंग, दूरस्थ इलाकों तक पहुंचीं मेडिकल टीमें

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कावर्धा l छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में चलाया जा रहा “मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान” अब तेजी से प्रभाव दिखा रहा है। घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और दूर-दराज के गांवों में रहने वाले लोगों के लिए यह अभियान उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। जहां पहले इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, वहीं अब स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद लोगों के घरों तक पहुंच रही हैं।

अभियान के पहले 10 दिनों में ही 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अब पहले से कहीं अधिक व्यापक हो गई है। बड़ी संख्या में मरीजों को मौके पर ही निःशुल्क दवाएं और प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को तत्काल राहत मिली।

इस अभियान की खास बात यह है कि गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों की समय पर पहचान कर उन्हें उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया जा रहा है। अब तक 8055 मरीजों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज और अन्य विशेष संस्थानों में भेजा गया है, जहां उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उपचार मिल रहा है।

जांच के दौरान कई गंभीर बीमारियों के मामलों की पहचान भी हुई है। इनमें मलेरिया के 1125, टीबी के 3245, कुष्ठ के 2803, मुख कैंसर के 1999, सिकल सेल के 1527 और मोतियाबिंद के 2496 मामले शामिल हैं। समय पर इन बीमारियों की पहचान होने से मरीजों को जल्द उपचार मिल पा रहा है, जिससे जटिलताओं को कम करने और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल रही है।

अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक मजबूत और समन्वित व्यवस्था विकसित की है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों तक सभी स्तरों पर बेहतर तालमेल सुनिश्चित किया गया है। मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और विशेष स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से उन क्षेत्रों में भी सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जहां पहले चिकित्सा सुविधाएं बेहद सीमित थीं।

इसके साथ ही डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। लोगों के “आभा” (ABHA) हेल्थ आईडी तैयार किए जा रहे हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रह सकें। इससे भविष्य में इलाज के दौरान डॉक्टरों को मरीज की पूरी जानकारी तुरंत मिल सकेगी और उपचार में तेजी आएगी।

इस अभियान ने न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाई है, बल्कि लोगों के मन में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रति विश्वास भी मजबूत किया है। अब बस्तर के सुदूर गांवों में रहने वाले लोग इलाज के लिए शहरों पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाएं खुद उनके दरवाजे तक पहुंच रही हैं।

कुल मिलाकर, यह अभियान बस्तर जैसे दुर्गम क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है। आने वाले समय में इसके और सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं, जिससे क्षेत्र के लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा।