बलरामपुर में NH-343 मुआवजा राशि में गड़बड़ी का आरोप, भाई ने हड़पे 4.55 लाख; न्याय की गुहार

बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में NH-343 निर्माण के लिए अधिगृहीत पैतृक जमीन के मुआवजे में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। पीड़ित ने अपने ही भाई पर उसके हिस्से की 4,55,938 रुपये की राशि अपने पास रखने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने प्रशासन से मामले की जांच, कार्रवाई और राशि वापस दिलाने की मांग की है।

Aug 21, 2026 - 19:44
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बलरामपुर में NH-343 मुआवजा राशि में गड़बड़ी का आरोप, भाई ने हड़पे 4.55 लाख; न्याय की गुहार

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग NH-343 के निर्माण के लिए अधिगृहीत की गई जमीन के मुआवजे में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। ग्राम भनौरा, तहसील एवं जिला बलरामपुर-रामानुजगंज निवासी एक व्यक्ति ने अपने ही भाई पर उसके हिस्से की मुआवजा राशि अपने पास रखने का आरोप लगाया है। पीड़ित ने प्रशासन से मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ कार्रवाई करने और उसके हिस्से की राशि वापस दिलाने की मांग की है।

मामला ग्राम भनौरा स्थित खसरा नंबर 438 से जुड़ा है। इस जमीन का कुल रकबा 0.14 हेक्टेयर बताया गया है। राजस्व अभिलेखों के अनुसार यह पैतृक भूमि तीन भाइयों के संयुक्त खाते में दर्ज है। इसमें आवेदक के साथ रामसकल और अम्बिका, पिता जटा, के नाम शामिल हैं।

उप-विभागीय अधिकारी राजस्व एवं भू-अर्जन अधिकारी, रामानुजगंज के प्रकरण क्रमांक 09/अ-82/2019-20 में पारित अवार्ड दिनांक 4 जुलाई 2024 के तहत NH-343 निर्माण के लिए उक्त जमीन में से 0.013 हेक्टेयर यानी 130 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण किया गया था।

भूमि अधिग्रहण के एवज में कुल 13,67,813 रुपये मुआवजा राशि निर्धारित की गई। पीड़ित के अनुसार यह राशि तीनों खातेदारों के हिस्से के अनुसार उनके-अपने बैंक खातों में वितरित की जानी थी।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि मुआवजा राशि के वितरण में कथित गड़बड़ी के चलते पूरी 13,67,813 रुपये की राशि एक ही खातेदार रामसकल के HDFC बैंक, बलरामपुर शाखा स्थित खाते में ट्रांसफर कर दी गई।

पीड़ित का आरोप है कि उसके हिस्से की 4,55,938 रुपये की राशि भी इसी खाते में पहुंच गई। आरोप के मुताबिक, रामसकल ने उसके हिस्से की रकम वापस नहीं की और मांगने के बावजूद राशि देने से इनकार कर दिया।

पीड़ित ने अधिकारियों के समक्ष आवेदन देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उसका कहना है कि मुआवजा राशि के वितरण में हुई गड़बड़ी की जांच की जाए और यदि धोखाधड़ी अथवा विश्वासघात के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाए।

पीड़ित ने अपने हिस्से की 4,55,938 रुपये की राशि वापस दिलाने की भी मांग की है। साथ ही मुआवजा वितरण में कथित प्रशासनिक और बैंक संबंधी लापरवाही की भी जांच की मांग उठाई गई है।

फिलहाल मामला पीड़ित द्वारा लगाए गए आरोपों और प्रशासन के समक्ष दिए गए आवेदन पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों की जांच और आगे की कार्रवाई के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।