सुकमा में वन भूमि पर अवैध खनन का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

सुकमा जिले के जगरगुंडा क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य के दौरान वन भूमि पर कथित अवैध गौण खनिज उत्खनन का मामला सामने आया है। कांग्रेस ने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच, ग्राम सभा से किए गए वादे पूरे करने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

Jul 30, 2026 - 11:51
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सुकमा में वन भूमि पर अवैध खनन का आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. रिजेंट गिरी, सुकमा l जिले के जगरगुंडा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत पेंटाचिमली के तुमलपाड़ में सड़क निर्माण कार्य के दौरान वन भूमि पर कथित रूप से गौण खनिज के अवैध उत्खनन का मामला सामने आया है। आरोप है कि बीआरओ (बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन) के अधीन सड़क निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों द्वारा बिना वैधानिक अनुमति के वन क्षेत्र से बड़े पैमाने पर बोल्डर निकालकर निर्माण कार्य में उपयोग किया जा रहा है। मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार वन परिक्षेत्र जगरगुंडा के पूवर्ती-1 डीपीएफ कक्ष क्रमांक 475 की लगभग एक हेक्टेयर वन भूमि पर कथित रूप से गौण खनिज का उत्खनन किया गया है। आरोप है कि उड़ीसा की धन लक्ष्मी माइनिंग्स कंपनी द्वारा खनिज विभाग की आवश्यक अनुमति के बिना वन क्षेत्र से बड़े पैमाने पर बोल्डर निकाले गए। ग्रामीणों का दावा है कि अब तक हजारों वाहनों में बोल्डर परिवहन कर सड़क निर्माण कार्य में उपयोग किया जा चुका है।

स्थानीय लोगों के अनुसार यह कार्य बीआरओ के अधीन संचालित सड़क निर्माण परियोजना से जुड़ा है, जिसका निर्माण रायपुर के ठेकेदार अंकित बजाज द्वारा कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से यह गतिविधि जारी रहने के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

इधर कांग्रेस जिला अध्यक्ष हरीश कवासी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मामले में गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण के लिए ग्राम पंचायत पेंटाचिमली के ग्रामीणों से ग्राम सभा के माध्यम से खनन की सहमति ली गई थी। इसके बदले ग्रामीणों को बोरिंग, खेत जुताई और अन्य विकास कार्य कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इनमें से कोई भी वादा पूरा नहीं किया गया।

हरीश कवासी ने यह भी आरोप लगाया कि कई महीनों से वन भूमि पर बिना आवश्यक वैधानिक अनुमति के खनन कार्य जारी रहा। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि खनन की अनुमति नहीं थी, तो इतने लंबे समय तक यह गतिविधि किसके संरक्षण में संचालित होती रही और संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

कांग्रेस ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने, ग्राम सभा से किए गए सभी वादों को पूरा करने तथा यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों, ठेकेदारों और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई करने की मांग की है।

फिलहाल इस मामले में संबंधित विभागों की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले की सत्यता और जिम्मेदारियों का निर्धारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है।