स्वास्थ्य सेवाओं में वैज्ञानिक मूल्यांकन का बढ़ेगा दायरा, HTA पर रायपुर में विशेषज्ञों का मंथन

रायपुर में State-Level Health Technology Assessment Sensitization Meeting का आयोजन किया गया। बैठक में नई स्वास्थ्य तकनीकों, दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य सेवाओं की प्रभावशीलता एवं लागत-प्रभावशीलता के वैज्ञानिक आकलन पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने HTA को साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य नीतियां बनाने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग में उपयोगी बताया।

Aug 25, 2026 - 09:50
Aug 25, 2026 - 09:51
 0  2
स्वास्थ्य सेवाओं में वैज्ञानिक मूल्यांकन का बढ़ेगा दायरा, HTA पर रायपुर में विशेषज्ञों का मंथन

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, प्रभावशीलता और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में Health Technology Assessment यानी HTA के दायरे को बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। इसी उद्देश्य से सोमवार को नवा रायपुर स्थित संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं के सभा कक्ष में State-Level Health Technology Assessment Sensitization Meeting का आयोजन किया गया। बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र में उपयोग की जा रही नई तकनीकों, दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य सेवाओं की लागत-प्रभावशीलता के वैज्ञानिक आकलन पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की।

ICMR-NIHR भुवनेश्वर द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन छत्तीसगढ़ के सहयोग से आयोजित इस बैठक का उद्देश्य राज्य के अधिकारियों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों को Health Technology Assessment की अवधारणा, प्रक्रिया और उपयोगिता से परिचित कराना था। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि किसी नई स्वास्थ्य तकनीक, दवा, चिकित्सा उपकरण अथवा स्वास्थ्य हस्तक्षेप को अपनाने से पहले उसके वैज्ञानिक प्रमाण, प्रभावशीलता और लागत-प्रभावशीलता का व्यवस्थित मूल्यांकन किस प्रकार किया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने बताया कि HTA के माध्यम से किसी स्वास्थ्य तकनीक के वैज्ञानिक प्रमाण, स्वास्थ्य परिणाम और आर्थिक प्रभाव का आकलन किया जाता है। इससे नीति निर्धारकों को उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए निर्णय लेने में सहायता मिलती है। स्वास्थ्य सेवाओं में प्राथमिकताएं तय करने और साक्ष्य आधारित नीतियां तैयार करने की प्रक्रिया को भी इससे मजबूती मिल सकती है।

बैठक के दौरान HTA की अवधारणा, इसके सिद्धांत और साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य निर्णयों में इसकी भूमिका पर तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। ICMR-NIHR की ओर से HTA के व्यावहारिक उपयोग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में इसके प्रभाव से जुड़े उदाहरण प्रस्तुत किए गए। राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम के संदर्भ में डायग्नोस्टिक टेस्ट की लागत-प्रभावशीलता, AI आधारित Chest X-ray तथा MDR-TB के उपचार के लिए BPaLM और BPaL दवा रेजिमेन जैसे नवाचारों पर भी चर्चा हुई। बताया गया कि वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद इन नवाचारों को राष्ट्रीय टीबी कार्यक्रम में अपनाया गया है।

विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में नई तकनीकों और उपचार पद्धतियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में वैज्ञानिक प्रमाणों और आर्थिक प्रभावों के आधार पर उनका मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण है। HTA के माध्यम से यह समझने में मदद मिलती है कि किसी तकनीक या स्वास्थ्य हस्तक्षेप से मरीजों को कितना लाभ मिल सकता है और उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किस प्रकार अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

बैठक में HTA Resource Hub की Principal Investigator डॉ. कविता राजसेकर, Scientist-F, HTAIn, Department of Health Research, नई दिल्ली, डॉ. सुलग्ना नायक, Project Senior Health Economist (Medical), ICMR-NIHR भुवनेश्वर तथा डॉ. देबदत्ता भट्टाचार्य, Scientist-E एवं Hub Coordinator, ICMR-NIHR भुवनेश्वर सहित विभिन्न विशेषज्ञ और प्रतिनिधि शामिल हुए। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, ICMR-NIHR तथा स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े अन्य संस्थानों के अधिकारियों और प्रतिनिधियों ने भी बैठक में सहभागिता की। बैठक के माध्यम से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े निर्णयों को अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और साक्ष्य आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा हुई।