जीएसटी दरों में बदलाव के एक साल बाद कांग्रेस ने उपभोक्ताओं तक राहत पहुंचने पर उठाए सवाल
जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक के बाद कई वस्तुओं और सेवाओं पर संशोधित जीएसटी दरें 22 सितंबर 2025 से लागू हुई थीं। अब इसके एक वर्ष पूरा होने पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने दावा किया है कि कर राहत का अपेक्षित लाभ उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l जीएसटी दरों में बदलाव को एक वर्ष पूरा होने पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि 22 सितंबर 2025 से लागू जीएसटी दरों में बदलाव के बाद सरकार की ओर से आम उपभोक्ताओं को राहत मिलने की बात कही गई थी, लेकिन कांग्रेस के अनुसार इस राहत का अपेक्षित लाभ बाजार में उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाया है।
जीएसटी परिषद की 56वीं बैठक में कई वस्तुओं और सेवाओं की दरों में बदलाव की सिफारिश की गई थी। सरकार के अनुसार, इन बदलावों का उद्देश्य जीएसटी ढांचे को सरल बनाना और आम लोगों, किसानों, श्रम-प्रधान क्षेत्रों तथा अन्य वर्गों को राहत देना था। कई वस्तुओं पर दरों में कमी की गई और नई व्यवस्था के तहत मुख्य रूप से 5 और 18 प्रतिशत की दरों के साथ कुछ चुनिंदा वस्तुओं एवं सेवाओं के लिए 40 प्रतिशत की विशेष दर रखी गई। संशोधित दरें अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं के लिए 22 सितंबर 2025 से प्रभावी हुई थीं।
सुरेंद्र वर्मा ने आरोप लगाया कि जीएसटी दरों में कटौती के बावजूद रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में उपभोक्ताओं को अपेक्षित राहत नहीं मिली। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि टैक्स दरों में बदलाव का लाभ अंतिम ग्राहक तक किस तरह पहुंचा और इसकी निगरानी के लिए राज्य स्तर पर क्या व्यवस्था की गई।
कांग्रेस प्रवक्ता ने दावा किया कि राज्य के वाणिज्यिक कर विभाग और खाद्य विभाग की ओर से कथित तौर पर पर्याप्त निगरानी नहीं की गई। उन्होंने कीमतों में कमी के लाभ को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था और आवश्यक कार्रवाई की मांग की।
वर्मा ने कहा कि एक वर्ष पहले जीएसटी सुधारों को उपभोक्ताओं के लिए राहत से जोड़कर प्रस्तुत किया गया था। अब एक साल बाद सरकार को विभिन्न आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और जीएसटी दरों में हुए बदलाव के वास्तविक प्रभाव का तथ्यात्मक आकलन सार्वजनिक करना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि टैक्स राहत और बाजार कीमतों के बीच अंतर की स्थिति में उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए निगरानी जरूरी है। कांग्रेस ने सरकार से जीएसटी दरों में बदलाव के बाद कीमतों की स्थिति, उपभोक्ताओं को मिले लाभ और बाजार में मूल्य निर्धारण की निगरानी से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।
केंद्र सरकार ने 2025 में जीएसटी दरों में बदलाव को कर ढांचे को सरल बनाने और उपभोक्ताओं को राहत देने वाला कदम बताया था। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, कई दैनिक उपयोग की वस्तुओं सहित विभिन्न श्रेणियों में जीएसटी दरों को कम किया गया था।
कांग्रेस की ओर से जारी बयान में सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि जीएसटी सुधारों के एक वर्ष बाद सरकार को यह बताना चाहिए कि दरों में बदलाव का वास्तविक आर्थिक प्रभाव उपभोक्ताओं पर कितना पड़ा। उन्होंने आम जनता से जुड़े रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर निगरानी बढ़ाने और टैक्स राहत का लाभ सुनिश्चित करने की मांग की।