5 नवंबर को 3,500 से अधिक CHO करेंगे स्वास्थ्य भवन का घेराव, लंबित इंसेंटिव भुगतान को लेकर आंदोलन
छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के आह्वान पर 5 नवंबर 2026 को 3,500 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन का घेराव करेंगे। संघ ने 7 से 8 माह की लंबित प्रोत्साहन राशि के भुगतान, इंसेंटिव से जुड़ी कथित अनुचित कार्रवाई रोकने और कार्य-दायित्व स्पष्ट करने सहित पांच सूत्रीय मांगें रखी हैं। संघ का आरोप है कि राज्य कार्यालय के निर्देशों के बावजूद जिला और ब्लॉक स्तर पर भुगतान में लगातार देरी हो रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. अशोक मिश्रा, तिल्दा नेवरा l छत्तीसगढ़ में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) ने लंबित प्रोत्साहन राशि और सेवा संबंधी समस्याओं को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के आह्वान पर 5 नवंबर 2026 को प्रदेश के 3,500 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यालय का घेराव करेंगे। संघ ने लंबित इंसेंटिव भुगतान, कथित अनुचित कार्रवाई, कार्यों के अतिरिक्त बोझ और नौकरी से निकाले जाने की धमकियों जैसी समस्याओं को आंदोलन का प्रमुख कारण बताया है।
संघ के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को पिछले तीन से चार वर्षों से प्रोत्साहन राशि के भुगतान के लिए लगातार ज्ञापन और आंदोलन करना पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि शासन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रोत्साहन राशि का भुगतान समय पर होना चाहिए, लेकिन कई जिलों में सत्यापन और भुगतान की प्रक्रिया में महीनों की देरी हो रही है।
संघ ने दावा किया है कि राज्य कार्यालय की ओर से प्रत्येक माह की 10 तारीख तक PLP पोर्टल के माध्यम से प्रोत्साहन राशि का सत्यापन कर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद जिला और ब्लॉक स्तर पर इन निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है। संगठन ने इसे प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।
इंसेंटिव घोटाले के नाम पर की जा रही कार्रवाई को लेकर भी संघ ने आपत्ति जताई है। संगठन का आरोप है कि जांच और कार्रवाई में केवल सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि प्रोत्साहन राशि संस्थागत प्रदर्शन और उप स्वास्थ्य केंद्र स्तर के स्वास्थ्य संकेतकों पर आधारित होती है। संघ ने मांग की है कि किसी भी अनियमितता की जांच संबंधित संस्था के सभी कर्मचारियों की भूमिका और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष रूप से की जाए।
संघ की पांच प्रमुख मांगों में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ जारी कथित अनुचित आदेश को निरस्त या संशोधित करना, पिछले 7 से 8 माह की लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान और इंसेंटिव को मूल वेतन में समायोजित करना शामिल है। इसके अलावा उप स्वास्थ्य केंद्रों में सभी पदों के कार्य-दायित्व यानी TOR स्पष्ट करने, सुकमा जिले में PLP पोर्टल पर सत्यापन के बाद निर्धारित ग्रेड से अलग भुगतान के मामले की जांच करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
प्रदेश अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से प्रदेश की प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को आम जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उनके आर्थिक हितों और कार्य परिस्थितियों से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। उन्होंने शासन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अधिकारियों से 5 नवंबर के घेराव से पहले मांगों पर ठोस निर्णय लेने की अपील की है।
संघ ने चेतावनी दी है कि मांगों का निराकरण नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक तथा चरणबद्ध रूप दिया जाएगा। फिलहाल 5 नवंबर को प्रस्तावित घेराव को लेकर प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी लामबंद हो रहे हैं। यह आंदोलन स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के सामने लंबित भुगतान तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सवाल खड़े कर सकता है।