किस्त के नाम पर 8 महीने पहले उठा ले गए बाइक, अब फाइनेंसर मांग रहा किस्त; मनीष विश्वकर्मा ने SDOP कार्यालय में दिया आवेदन

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के चितरंगी तहसील अंतर्गत ग्राम केंकराई निवासी मनीष विश्वकर्मा ने मोटरसाइकिल को लेकर फाइनेंस से जुड़े मामले में पुलिस से शिकायत की है। मनीष के अनुसार, करीब 8 महीने पहले अर्जुन विश्वकर्मा और भोले विश्वकर्मा फाइनेंसर के कहने पर उनकी बाइक ले गए थे। उन्हें लगा कि बाइक फाइनेंस एजेंसी में जमा करा दी गई है, इसलिए उन्होंने किस्तें देना बंद कर दिया। लेकिन 26 सितंबर को फाइनेंसर के लोग दोबारा किस्त मांगने पहुंच गए। अब मनीष ने चितरंगी SDOP कार्यालय में आवेदन देकर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है।

Nov 1, 2026 - 17:59
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किस्त के नाम पर 8 महीने पहले उठा ले गए बाइक, अब फाइनेंसर मांग रहा किस्त; मनीष विश्वकर्मा ने SDOP कार्यालय में दिया आवेदन

UNITED NEWS OF ASIA. आदर्श तिवारी, सिंगरौली l मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले की चितरंगी तहसील अंतर्गत ग्राम केंकराई से मोटरसाइकिल फाइनेंस को लेकर एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां रहने वाले मनीष विश्वकर्मा ने आरोप लगाया है कि करीब 8 महीने पहले फाइनेंसर के कहने पर उनकी मोटरसाइकिल ले जाई गई थी, लेकिन अब फाइनेंसर के लोग दोबारा किस्त की मांग कर रहे हैं। इस मामले को लेकर मनीष ने चितरंगी SDOP कार्यालय में लिखित आवेदन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।

मनीष विश्वकर्मा के अनुसार, फरवरी 2026 में उत्तर प्रदेश के शिवद्वार से अर्जुन विश्वकर्मा और भोले विश्वकर्मा, दोनों निवासी ग्राम केंकराई, उनकी मोटरसाइकिल लेने पहुंचे थे। मनीष का कहना है कि दोनों ने फाइनेंसर के कहने पर बाइक उठाई थी। उन्हें लगा कि उनकी मोटरसाइकिल फाइनेंस एजेंसी में जमा करा दी गई है। इसी वजह से उन्होंने इसके बाद मोटरसाइकिल की आगे की किस्तें जमा करना बंद कर दिया।

मामले में नया मोड़ 26 सितंबर 2026 को आया, जब फाइनेंसर से जुड़े कुछ लोग दोबारा मनीष के पास पहुंचे। मनीष के मुताबिक, उन्होंने बाइक की बकाया किस्तें जमा करने की मांग की। साथ ही कहा कि काफी समय से किस्त जमा नहीं हुई है, इसलिए या तो मोटरसाइकिल वापस दी जाए या फिर बकाया राशि का भुगतान किया जाए।

इसके बाद मनीष ने उन लोगों को बताया कि उनकी मोटरसाइकिल तो करीब 8 महीने पहले ही फाइनेंसर के कहने पर ले जाई जा चुकी है। ऐसे में उनके सामने सवाल खड़ा हो गया कि जब बाइक पहले ही ले ली गई थी, तो अब किस आधार पर किस्त मांगी जा रही है। मनीष का कहना है कि उन्हें अब तक यह स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है कि उनकी मोटरसाइकिल कहां है और उसे किसके पास जमा कराया गया है।

इस पूरे मामले में अब कई सवाल उठ रहे हैं। यदि मोटरसाइकिल फाइनेंस एजेंसी के पास जमा कराई गई थी, तो उसका रिकॉर्ड क्या है? बाइक लेने वाले लोगों ने उसे कहां पहुंचाया? क्या फाइनेंस कंपनी के रिकॉर्ड में मोटरसाइकिल जमा होने की कोई जानकारी दर्ज है? और यदि बाइक जमा नहीं हुई, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

मनीष विश्वकर्मा ने मामले को गंभीर बताते हुए चितरंगी SDOP कार्यालय में लिखित आवेदन दिया है। उन्होंने पुलिस से पूरे घटनाक्रम की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है। इस मामले में बब्बू प्रसाद विश्वकर्मा और मनीष विश्वकर्मा ने भी अपनी बात रखी है।

फिलहाल शिकायत के आधार पर पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई का इंतजार है। अब देखना होगा कि जांच में मोटरसाइकिल को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं और मनीष विश्वकर्मा को उनकी बाइक वापस मिल पाती है या नहीं।