MP में जेल सुधार अधिनियम लागू करने की तैयारी, 10 कार्य दिवसों में रिपोर्ट देगी 4 IAS अधिकारियों की समिति

मध्य प्रदेश सरकार जेल व्यवस्था को अधिक मानवीय, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की तैयारी कर रही है। जेल सुधार अधिनियम-2024 के क्रियान्वयन के लिए नियम-2026 तैयार किए जा रहे हैं। इसके परीक्षण और सुझाव देने के लिए चार वरिष्ठ IAS अधिकारियों की समिति गठित की गई है। समिति को 10 कार्य दिवसों में अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपनी है। प्रस्तावित व्यवस्था में बंदियों के कानूनी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और परिजनों से संपर्क की सुविधाओं पर जोर दिया गया है।

Nov 1, 2026 - 14:38
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MP में जेल सुधार अधिनियम लागू करने की तैयारी, 10 कार्य दिवसों में रिपोर्ट देगी 4 IAS अधिकारियों की समिति

UNITED NEWS OF ASIA. मध्य प्रदेश में जेल व्यवस्था को अधिक मानवीय, पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। सरकार जेल सुधार अधिनियम-2024 को लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए नियम-2026 तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रस्तावित नियमों का परीक्षण करने और आवश्यक सुझाव देने के लिए चार वरिष्ठ IAS अधिकारियों की उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है। इस समिति को 10 कार्य दिवसों के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव को सौंपनी होगी। सरकार की इस कवायद का उद्देश्य प्रदेश की जेलों में बंदियों के अधिकारों का संरक्षण करने के साथ जेल प्रशासन को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है।

सामान्य प्रशासन विभाग के उप सचिव जयेंद्र कुमार विजयवर्गीय द्वारा इस विशेष समिति का गठन किया गया है। समिति में जेल विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश कुमार, वित्त विभाग के सचिव लोकेश जाटव, गृह विभाग की सचिव शिल्पा गुप्ता और विधि विभाग के सचिव मुकेश कुमार को शामिल किया गया है। इसके अलावा जेल विभाग के उप सचिव कमल नागर भी समिति का हिस्सा होंगे। समिति प्रस्तावित नियमों के विभिन्न पहलुओं का परीक्षण करेगी और उनके क्रियान्वयन को लेकर अपनी सिफारिशें तैयार करेगी।

बंदियों के अधिकार और सुविधाओं पर जोर

प्रस्तावित जेल सुधार व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य बंदियों को केवल सजा देने तक सीमित न रहकर उनके सुधार और पुनर्वास पर ध्यान देना है। इसके तहत बंदियों को समय पर मुफ्त कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही जेलों में बंद लोगों को उच्च शिक्षा और बुनियादी शिक्षा प्राप्त करने के अवसर देने की योजना है। सरकार का उद्देश्य है कि बंदी जेल में रहते हुए भी अपनी शिक्षा जारी रख सकें और रिहाई के बाद समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए बेहतर तैयारी कर सकें।

जेलों में स्वास्थ्य सुविधाओं को भी सुदृढ़ करने का प्रस्ताव है। बंदियों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ उनकी नियमित स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा। इसके अलावा कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने पर ध्यान दिया जाएगा। इससे उन्हें जेल से बाहर आने के बाद रोजगार और आजीविका के अवसर प्राप्त करने में मदद मिल सकती है।

तकनीक से आधुनिक होंगी जेलें

नए नियमों में जेल प्रशासन के कामकाज में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने की भी तैयारी है। इसके तहत पेशी और अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा का विस्तार किया जा सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए टेलीमेडिसिन का उपयोग और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आधुनिक उपकरणों को शामिल करने पर जोर दिया गया है।

इसके साथ ही बंदियों को अपने परिजनों से संपर्क बनाए रखने की सुविधा को अधिक सुगम बनाने का प्रस्ताव है। इससे बंदियों के पारिवारिक संबंधों को बनाए रखने और उनके मानसिक व सामाजिक पुनर्वास में मदद मिल सकती है।

पुराने कानूनों की जगह लेगी नई व्यवस्था

प्रस्तावित जेल सुधार अधिनियम के लागू होने के बाद जेल व्यवस्था से जुड़े पुराने तीन कानूनों की जगह नई आधुनिक कानूनी व्यवस्था लेगी। हालांकि, इसके लिए नियम-2026 के परीक्षण और अंतिम प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। फिलहाल चार वरिष्ठ IAS अधिकारियों की समिति को निर्धारित समयसीमा में रिपोर्ट सौंपनी है। इसके बाद सरकार समिति की सिफारिशों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

कुल मिलाकर मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल जेलों को केवल दंड देने वाली व्यवस्था के बजाय सुधार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। नए नियमों के अंतिम स्वरूप और उनके लागू होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रदेश की जेल व्यवस्था में किस स्तर पर बदलाव देखने को मिलेंगे।