बुधनी में फैक्ट्रियों के रासायनिक पानी से नर्मदा प्रदूषित होने का आरोप, कालियादेह नदी पर मंडराया खतरा
मध्य प्रदेश के बुधनी क्षेत्र में फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित पानी को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर चिंता जताई है। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले करीब 8 वर्षों से रासायनिक और गंदा पानी खेतों से होते हुए कालियादेह नदी में मिल रहा है और आगे खर्रा घाट के पास मां नर्मदा तक पहुंच रहा है। पानी में सफेद झाग और तेज दुर्गंध होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पानी में मौजूद रासायनिक तत्वों और पर्यावरण पर उसके प्रभाव की पुष्टि वैज्ञानिक जांच के बाद ही हो सकेगी।
UNITED NEWS OF ASIA. मध्य प्रदेश के बुधनी क्षेत्र से मां नर्मदा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ाने वाला मामला सामने आया है। यहां फैक्ट्रियों से निकलने वाले कथित रासायनिक और गंदे पानी के बहाव को लेकर स्थानीय ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि पिछले करीब 8 वर्षों से लगातार दूषित पानी बह रहा है, जो खेतों और प्राकृतिक जलमार्गों से होते हुए कालियादेह नदी में मिल रहा है। इसके बाद यह पानी खर्रा घाट के पास मां नर्मदा तक पहुंच रहा है। यदि ग्रामीणों के दावों की पुष्टि होती है, तो यह मामला नदी और आसपास के पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय बन सकता है।
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, फैक्ट्रियों के आसपास से निकलने वाले इस पानी में सफेद झाग दिखाई देता है और इससे तेज दुर्गंध आती है। स्थिति ऐसी बताई जा रही है कि आसपास से गुजरने वाले लोगों को मुंह ढंककर निकलना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से इस समस्या को लेकर चिंता जता रहे हैं, लेकिन दूषित पानी का बहाव लगातार जारी है। उनका आरोप है कि इस पानी से खेतों, पशुओं और आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ग्रामीणों ने पशुओं की सेहत, भूजल की गुणवत्ता और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य को लेकर भी आशंका जताई है। हालांकि, इन प्रभावों की अभी वैज्ञानिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
मैदानी निरीक्षण के दौरान पानी के बहाव का एक रास्ता सामने आने की बात कही गई है। शुरुआती पड़ताल के अनुसार, वर्धमान फैक्ट्री की बाउंड्री के पास बने एक बड़े रास्ते से पानी बाहर निकलता दिखाई देता है। इसके बाद यह बुधनी-सल्कनपुर रोड के नीचे बनी पुलिया से गुजरता है। आगे ट्राइडेंट और वर्धमान कंपनियों के बीच से होकर पानी का बहाव जारी रहता है। इसी हिस्से में ट्राइडेंट की ओर से आने वाला पानी भी इसमें मिलता हुआ दिखाई देने का दावा किया गया है।
इसके बाद यह पानी खेतों से गुजरते हुए लगभग पांच किलोमीटर का रास्ता तय करता है। ग्रामीणों के अनुसार, दोनों कंपनियों की ओर से आने वाले पानी का बहाव आगे करीब आधा से एक किलोमीटर तक बढ़ता है और फिर पुराने देवगांव के पास कालियादेह नदी में मिल जाता है। ग्रामीणों का दावा है कि कालियादेह नदी के रास्ते यह पानी आगे खर्रा घाट के पास मां नर्मदा में पहुंच रहा है। इससे कालियादेह नदी के अस्तित्व और उसकी स्वच्छता को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पानी में आखिर कौन-कौन से रासायनिक तत्व मौजूद हैं और उनका पर्यावरण, खेती, पशुओं तथा मानव स्वास्थ्य पर कितना प्रभाव पड़ सकता है। इसकी पुष्टि केवल पानी के नमूनों की प्रयोगशाला जांच और संबंधित विशेषज्ञों की वैज्ञानिक रिपोर्ट से ही हो सकती है। इसलिए जरूरी है कि संबंधित विभाग पानी के नमूने लेकर निष्पक्ष जांच कराएं और प्रदूषण के स्रोत की पहचान करें।
मां नर्मदा करोड़ों लोगों की आस्था के साथ-साथ पेयजल, कृषि और जीवन का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में नदी तक दूषित पानी पहुंचने की आशंका को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभागों की जांच जरूरी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिम्मेदार एजेंसियां मामले का संज्ञान लेकर स्थिति स्पष्ट करेंगी और यदि प्रदूषण की पुष्टि होती है तो उसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।