दुर्ग की शासकीय प्राथमिक शाला ढौर क्रमांक 2 में मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती, बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया जागरूकता का संदेश

दुर्ग जिले की शासकीय प्राथमिक शाला ढौर क्रमांक 2 में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर बैगलेस डे और सुरक्षित शनिवार का विशेष आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने रामायण आधारित कविता पाठ, कहानी, नृत्य नाटिका, चित्रकला और बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट मॉडल के जरिए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। वहीं गुड टच-बैड टच और सड़क सुरक्षा पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर जागरूकता का संदेश दिया।

Nov 1, 2026 - 15:15
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दुर्ग की शासकीय प्राथमिक शाला ढौर क्रमांक 2 में मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती, बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया जागरूकता का संदेश

UNITED NEWS OF ASIA. लोकेश्वर सिंह ठाकुर, दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले की शासकीय प्राथमिक शाला ढौर क्रमांक 2 में महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर बैगलेस डे और सुरक्षित शनिवार का अनूठा संगम देखने को मिला। विद्यालय में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता, सांस्कृतिक प्रतिभा और सामाजिक जागरूकता का शानदार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को महर्षि वाल्मीकि के जीवन और उनके विचारों से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें व्यवहारिक शिक्षा और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधान पाठक अनिल कुमार थारवानी, शिक्षिका सुनीता साहू और धनेश्वरी बंजारे ने महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। इस अवसर पर विद्यार्थियों को महर्षि वाल्मीकि के जीवन से जुड़ी प्रेरक जानकारी दी गई। बच्चों को बताया गया कि किस तरह रत्नाकर ने अपने जीवन में परिवर्तन करते हुए महर्षि वाल्मीकि के रूप में पहचान बनाई। उनकी यह यात्रा आत्मपरिवर्तन, दृढ़ संकल्प और सकारात्मक सोच का संदेश देती है।

बैगलेस डे के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए विभिन्न रचनात्मक और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं। बच्चों ने रामायण पर आधारित कविता पाठ और कहानी प्रस्तुत की। इसके साथ ही नृत्य नाटिका के माध्यम से रामायण के प्रसंगों को जीवंत करने का प्रयास किया। चित्रकला गतिविधि में विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशक्ति और कला कौशल का प्रदर्शन किया। वहीं बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट गतिविधि के तहत अनुपयोगी वस्तुओं से उपयोगी मॉडल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण और वस्तुओं के पुनः उपयोग का संदेश दिया।

कार्यक्रम में सुरक्षित शनिवार के तहत बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता से जुड़ी गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया गया। विद्यार्थियों ने गुड टच-बैड टच विषय पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर सुरक्षित और असुरक्षित स्पर्श के बीच अंतर समझाने का प्रयास किया। इस प्रस्तुति के माध्यम से बच्चों को अपने शरीर की सुरक्षा, किसी असहज स्थिति में अपनी बात कहने और भरोसेमंद व्यक्ति से मदद लेने के महत्व के बारे में जागरूक किया गया।

इसके साथ ही सड़क सुरक्षा विषय पर भी नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। इसमें यातायात नियमों का पालन करने, सड़क पार करते समय सावधानी बरतने और सुरक्षित आवागमन के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया। बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के जरिए यह बताने का प्रयास किया कि सुरक्षा से जुड़े छोटे-छोटे नियम जीवन में बड़ी भूमिका निभाते हैं।

महर्षि वाल्मीकि जयंती, बैगलेस डे और सुरक्षित शनिवार को एक साथ जोड़कर आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ कला, संस्कृति, रचनात्मकता और जीवनोपयोगी जानकारी सीखने का अवसर दिया। इस तरह विद्यालय में आयोजित गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनमें सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने की दिशा में उपयोगी रहीं।