निज निवास पर विधि-विधान से हुआ गौ माता का पूजन, नैनसुख जी ने गौ पालन और संरक्षण का दिया संदेश
निज निवास पर प्रांत ग्राम संयोजक नैनसुख जी की उपस्थिति में गौ माता का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया गया। इस अवसर पर नैनसुख जी ने गौ माता के धार्मिक और कृषि संबंधी महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रत्येक घर में गौ पालन को प्रोत्साहित करने की बात कही। उन्होंने बच्चों को गौ माता के महत्व से परिचित कराने और नियमित रूप से गौ सेवा करने का संदेश दिया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, भारतीय किसान संघ और अन्य सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
UNITED NEWS OF ASIA. वीरेंद्र यादव, छिंदवाड़ा l गौ माता के प्रति श्रद्धा और गौ संरक्षण का संदेश देने के उद्देश्य से निज निवास पर विधि-विधान के साथ गौ माता का पूजन-अर्चन किया गया। इस अवसर पर प्रांत ग्राम संयोजक नैनसुख जी की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक विधि से गौ माता की पूजा की गई और उपस्थित लोगों ने गौ सेवा तथा गौ पालन के महत्व पर विचार साझा किए।
इस अवसर पर नैनसुख जी ने कहा कि गौ माता को भारतीय परंपरा में माता का दर्जा दिया गया है और प्रत्येक व्यक्ति को गौ माता के प्रति श्रद्धा एवं सेवा भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि गौ माता का प्रतिदिन पूजन करना चाहिए और घरों में गौ पालन को भी प्रोत्साहित करना चाहिए। उनके अनुसार, भारतीय कृषि व्यवस्था में गौ माता का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और कृषि का आधार भी लंबे समय तक गौवंश से जुड़ा रहा है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि गौ माता के दर्शन करें, उनकी परिक्रमा करें और नियमित रूप से उनकी सेवा के लिए समय निकालें। साथ ही बच्चों को भी गौ माता के धार्मिक, सांस्कृतिक और कृषि संबंधी महत्व के बारे में जानकारी देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को गौ सेवा और संरक्षण के संस्कारों से जोड़ना जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस परंपरा और जिम्मेदारी को समझ सकें।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े मंजू जी, अरविंद बेलवंशी, सौरभ जैन और काशीराम सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। इसके अलावा पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कृष्ण कुमार साहू, मनोनीत पार्षद नीलेश साहू और भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष राजेश साहू ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।
पूजन कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने गौ माता के संरक्षण, गौ पालन और समाज में गौ सेवा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। आयोजन के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि गौवंश का संरक्षण केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पारंपरिक कृषि व्यवस्था के लिए भी इसका विशेष महत्व है।
कार्यक्रम का समापन गौ माता की सेवा और संरक्षण के संकल्प के साथ किया गया। उपस्थित लोगों ने गौ सेवा के संदेश को समाज के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की बात कही।
इस अवसर पर जय गौ माता, जय जवान-जय किसान, वंदे मातरम् और जय बलराम के उद्घोष भी किए गए।