DPS कवर्धा में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष प्रशिक्षण, शिक्षकों को एंग्जायटी-डिप्रेशन के लक्षण पहचानने की दी गई जानकारी
दिल्ली पब्लिक स्कूल, कवर्धा में 31 अक्टूबर 2026 को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण को लेकर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें शिक्षकों को एंग्जायटी, डिप्रेशन, फोबिया और PTSD जैसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के संभावित लक्षणों की पहचान करने की जानकारी दी गई। साथ ही PRASHAST App के उपयोग और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान एवं सहयोग की प्रक्रिया समझाई गई।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l छत्तीसगढ़ के कवर्धा स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक कल्याण को लेकर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 31 अक्टूबर 2026, शनिवार को आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को विद्यार्थियों की मानसिक और भावनात्मक जरूरतों के प्रति जागरूक एवं संवेदनशील बनाना था। कार्यक्रम का विषय “Promoting Mental Health and Wellness Students” रखा गया।
कार्यक्रम में रिसोर्स पर्सन के रूप में एम्बिशन पब्लिक स्कूल, पंडरिया के प्राचार्य रॉयन डी. फीग्रेड और नीरज विद्या मंदिर, डोंगरगांव के प्राचार्य जीवेश द्विवेदी उपस्थित रहे। दोनों प्रशिक्षकों ने शिक्षकों को विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी और बताया कि बच्चों के व्यवहार तथा भावनाओं में होने वाले बदलावों को समझना कितना महत्वपूर्ण है।
प्रशिक्षण के दौरान ‘Understanding Yourself’ विषय पर विशेष चर्चा की गई। हैंडआउट्स और केस स्टडीज के माध्यम से शिक्षकों को विद्यार्थियों की मानसिक स्थिति, व्यवहार और भावनात्मक बदलावों को समझने के लिए प्रेरित किया गया। इस दौरान एंग्जायटी, डिप्रेशन, फोबिया और पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) जैसी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के संभावित लक्षणों और उनकी पहचान के संकेतों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
प्रशिक्षकों ने बताया कि विद्यार्थियों के व्यवहार में अचानक बदलाव, भावनात्मक परेशानी या लगातार असामान्य प्रतिक्रिया जैसे संकेतों को संवेदनशीलता के साथ समझने की आवश्यकता है। शिक्षकों को बच्चों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करना चाहिए और उनकी बातों को बिना किसी पूर्वाग्रह के सुनना चाहिए। ऐसी परिस्थितियों में विद्यार्थियों को सकारात्मक माहौल देना, उनका मनोबल बढ़ाना और जरूरत पड़ने पर उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है। गंभीर स्थिति में विशेषज्ञ की सहायता लेने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
कार्यक्रम में PRASHAST App के उपयोग को लेकर भी जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान और उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की प्रक्रिया समझाई। विभिन्न उदाहरणों, गतिविधियों और केस स्टडीज के जरिए शिक्षकों को यह बताया गया कि किस तरह बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझकर उनकी शिक्षा और विकास में सहयोग किया जा सकता है।
इस एक दिवसीय प्रशिक्षण में विद्यालय के सभी शिक्षकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। शिक्षकों ने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को समझने में रुचि दिखाई और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में अपनी जिम्मेदारी को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्राचार्या ग्रेशिया एन. फीग्रेड और समस्त शिक्षकगण ने दोनों रिसोर्स पर्सन्स के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने उनके मार्गदर्शन और उपयोगी सुझावों के लिए धन्यवाद दिया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को विद्यार्थियों के मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक, संवेदनशील और सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।