बालोद: बोड़रा में तूफान के अलर्ट के बावजूद नहीं हुई मुनादी, सैकड़ों किसानों की कटी फसल बारिश में खराब होने का आरोप

बालोद जिले के गुरूर ब्लॉक के ग्राम बोड़रा में तूफान और बारिश के अलर्ट के बावजूद मुनादी नहीं होने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के कोटवार ने मौसम संबंधी चेतावनी की सूचना नहीं दी, जिसके कारण खेतों में कटी हुई फसल बारिश की चपेट में आकर खराब हो गई। जनपद उपाध्यक्ष दुर्गानंद साहू द्वारा फोन पर पूछताछ किए जाने पर कोटवार ने तबीयत खराब होने की बात कही। किसानों ने प्रशासन से फसल क्षति का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।

Nov 1, 2026 - 12:54
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बालोद: बोड़रा में तूफान के अलर्ट के बावजूद नहीं हुई मुनादी, सैकड़ों किसानों की कटी फसल बारिश में खराब होने का आरोप

UNITED NEWS OF ASIA. सुनील साहू, बालोद l छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से किसानों की परेशानी से जुड़ा मामला सामने आया है। गुरूर विकासखंड के ग्राम बोड़रा में मौसम विभाग की ओर से तूफान और बारिश का अलर्ट जारी होने के बावजूद गांव में मुनादी नहीं किए जाने का आरोप लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर सूचना नहीं मिलने के कारण कई किसानों को बारिश की जानकारी नहीं मिल पाई और खेतों में काटकर रखी गई उनकी फसल भीगकर खराब हो गई। इस घटना के बाद किसानों में नाराजगी है और उन्होंने प्रशासन से नुकसान का आकलन कर मुआवजा देने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, मौसम विभाग ने अर्बन तूफान के प्रभाव को लेकर पहले ही चेतावनी जारी की थी। प्रशासन की ओर से भी एहतियाती कदम उठाए गए थे। जिला और जनपद स्तर के अधिकारियों को अलर्ट पर रखा गया था। मौसम की स्थिति को देखते हुए स्कूलों में छुट्टी तक घोषित की गई थी। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम बोड़रा में मौसम संबंधी चेतावनी को लेकर कोटवार ने गांव में मुनादी नहीं कराई। इसके चलते किसानों तक समय पर जानकारी नहीं पहुंच सकी।

ग्रामीणों के मुताबिक, खेतों में कई किसानों की फसल कटकर पड़ी हुई थी। यदि समय रहते बारिश और तेज हवाओं की सूचना मिल जाती, तो किसान अपनी उपज को सुरक्षित स्थान पर रख सकते थे या उसे ढकने की व्यवस्था कर सकते थे। लेकिन सूचना के अभाव में फसल बारिश की चपेट में आ गई। ग्रामीणों का दावा है कि इससे सैकड़ों किसानों को नुकसान हुआ है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा प्रशासनिक सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

मामला सामने आने के बाद जनपद उपाध्यक्ष दुर्गानंद साहू ने गांव के कोटवार को फोन कर इस संबंध में पूछताछ की। बताया गया कि पूछताछ के दौरान कोटवार ने अपनी तबीयत खराब होने का हवाला दिया। इस जवाब के बाद ग्रामीणों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि यदि कोटवार की तबीयत खराब थी, तो परिवार के किसी सदस्य या गांव के अन्य व्यक्ति के माध्यम से भी मुनादी कराई जा सकती थी, ताकि किसानों तक समय पर सूचना पहुंच सके।

ग्रामीणों का सवाल है कि जब मौसम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर अलर्ट जारी था और लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए जा रहे थे, तब गांव के अंतिम व्यक्ति तक सूचना पहुंचाने की जिम्मेदारी कैसे अधूरी रह गई। किसानों का कहना है कि खेती उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और फसल खराब होने से परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो सकता है।

अब प्रभावित किसान प्रशासन से खेतों में पड़ी फसल के नुकसान का जल्द सर्वे कराने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि राजस्व और कृषि विभाग की टीम गांव पहुंचकर वास्तविक क्षति का आकलन करे और पात्र किसानों को नियमानुसार राहत राशि या मुआवजा उपलब्ध कराया जाए।

फिलहाल इस मामले में ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों और कोटवार द्वारा बताई गई तबीयत खराब होने की वजह के बीच प्रशासनिक जांच और नुकसान के आधिकारिक आकलन का इंतजार है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और प्रभावित किसानों को राहत कब तक मिल पाती है।