अर्नब तूफान से फसल क्षति का कृषि विभाग ने किया निरीक्षण, किसानों को बीमा और राहत की जानकारी दी
बेमेतरा जिले में अर्नब तूफान के प्रभाव से खरीफ फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए उप संचालक कृषि मोरध्वज डडसेना ने ग्राम कठिया और जेवरा का निरीक्षण किया। निरीक्षण में करीब 5 से 10 प्रतिशत फसल आंशिक रूप से गिरी हुई पाई गई, जबकि लगभग 85 प्रतिशत फसल अभी अपरिपक्व अवस्था में है। किसानों को जलभराव वाले खेतों से पानी निकालने और कटाई के बाद बारिश से प्रभावित उपज की सूचना 72 घंटे के भीतर फसल बीमा कंपनी को देने की सलाह दी गई।
UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में विगत दिनों आए अर्नब तूफान के प्रभाव से खरीफ फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए कृषि विभाग ने मैदानी स्तर पर निरीक्षण शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में उप संचालक कृषि मोरध्वज डडसेना ने विकासखंड के ग्राम पंचायत कठिया और जेवरा पहुंचकर प्रभावित खेतों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने फसलों की स्थिति का जायजा लिया और किसानों से चर्चा कर नुकसान से संबंधित जानकारी प्राप्त की।
निरीक्षण के दौरान सहायक संचालक कृषि, फसल बीमा कंपनी के प्रतिनिधि, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। अधिकारियों ने खेतों में जाकर फसलों की वास्तविक स्थिति देखी और तूफान तथा बारिश के कारण हुए नुकसान का आकलन किया। निरीक्षण में सामने आया कि दोनों गांवों में लगभग 5 से 10 प्रतिशत फसल आंशिक रूप से गिरी हुई है। वहीं, किसानों ने भी फसल को कम नुकसान होने की जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, इन गांवों में लगभग 85 प्रतिशत फसल अभी अपरिपक्व अवस्था में है।
निरीक्षण के दौरान उप संचालक कृषि ने किसानों को फसल सुरक्षा और नुकसान की स्थिति में जरूरी कदम उठाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जिन खेतों में तेज हवा और बारिश के कारण फसल गिर गई है तथा पानी का भराव हो गया है, वहां किसान तत्काल अतिरिक्त पानी की निकासी करें। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल को और नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए जलभराव की स्थिति में समय रहते उचित व्यवस्था करना जरूरी है।
इसके साथ ही किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत नुकसान की सूचना देने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि जिन किसानों ने फसल की कटाई के बाद उपज खेत में ही रखी हुई है और बारिश के कारण उस उपज को नुकसान पहुंचा है, उन्हें घटना की जानकारी 72 घंटे के भीतर फसल बीमा कंपनी को देना अनिवार्य है। इसके लिए किसान टोल फ्री नंबर 14447 पर संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। समय सीमा के भीतर सूचना देने से बीमा लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया में मदद मिलेगी।
उप संचालक कृषि ने विभागीय मैदानी अमले को निर्देशित किया कि वे राजस्व विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावित किसानों की जानकारी एकत्रित करें। साथ ही नुकसान की स्थिति का आकलन कर पात्र किसानों को राजस्व पुस्तक परिपत्र RBC 6(4) के तहत राहत राशि दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि प्रभावित किसानों की जानकारी जुटाने और पात्रता के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने में विभागीय स्तर पर समन्वय जरूरी है।
उप संचालक कृषि मोरध्वज डडसेना ने किसानों को आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन और कृषि विभाग फसलों की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार निरीक्षण और आकलन की कार्रवाई की जाएगी। शासन की योजनाओं और निर्धारित नियमों के अनुरूप पात्र किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।