जब हर सेकंड कीमती हो, क्रिटिकल केयर की जागरूकता बचा सकती है जान: डॉ. प्रदीप शर्मा
क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप शर्मा ने गंभीर बीमारी और आपात स्थिति में समय पर पहचान और उपचार के महत्व पर जोर दिया। हार्ट अटैक, स्ट्रोक, गंभीर संक्रमण, दुर्घटना, विषाक्तता और अन्य आपात स्थितियों में शुरुआती लक्षण पहचानकर तुरंत इमरजेंसी पहुंचना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण हो सकता है। उन्होंने CPR सीखने, सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने और बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक नहीं लेने की सलाह दी।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l जब किसी मरीज की स्थिति गंभीर होती है, तब इलाज का हर सेकंड महत्वपूर्ण हो जाता है। संक्रमण, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, दुर्घटना, बड़ी सर्जरी या विषाक्तता जैसी परिस्थितियों में तत्काल और विशेषज्ञ देखभाल की जरूरत पड़ सकती है। एनएच एमएमआई हॉस्पिटल रायपुर में इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन के सीनियर कंसल्टेंट एवं लीड डॉ. प्रदीप शर्मा के अनुसार, गंभीर बीमारी की समय पर पहचान और सही चिकित्सा सुविधा तक जल्द पहुंचना मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
क्रिटिकल केयर केवल आईसीयू में भर्ती होने के बाद शुरू नहीं होती, बल्कि गंभीर स्थिति के शुरुआती संकेतों की पहचान से ही इसकी शुरुआत हो जाती है। गंभीर संक्रमण में तेज सांस चलना, भ्रम की स्थिति, ब्लड प्रेशर कम होना और पेशाब की मात्रा कम होना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं। हार्ट अटैक की स्थिति में सीने में दबाव या दर्द, पसीना और सांस फूलना हो सकता है। वहीं स्ट्रोक में अचानक चेहरा टेढ़ा होना, हाथ-पैर में कमजोरी या बोलने और समझने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।
इन संकेतों को नजरअंदाज करने के बजाय मरीज को तत्काल इमरजेंसी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है। अचानक सांस लेने में बहुत अधिक परेशानी, भ्रम या बेहोशी, दौरे, सीने में दर्द के साथ पसीना और सांस फूलना, अचानक कमजोरी या बोलने में परेशानी, बहुत कम ब्लड प्रेशर, चक्कर आकर गिरना, पेशाब में काफी कमी, गंभीर चोट, विषाक्तता, अधिक रक्तस्राव या दवा की ओवरडोज जैसी परिस्थितियों में तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
गंभीर स्थिति में अस्पताल का चुनाव भी महत्वपूर्ण हो सकता है। हर अस्पताल में चौबीसों घंटे इंटेंसिविस्ट, लाइफ सपोर्ट, आवश्यक जांच और क्रिटिकल केयर की सभी सुविधाएं उपलब्ध हों, यह जरूरी नहीं है। इसलिए परिवारों को पहले से अपने क्षेत्र में उपलब्ध इमरजेंसी सेवाओं और गंभीर मरीजों के उपचार की क्षमता के बारे में जानकारी रखना उपयोगी हो सकता है। आपात स्थिति में सही अस्पताल तक जल्द पहुंचना उपचार में देरी को कम करने में मदद कर सकता है।
आम नागरिक भी आपात स्थिति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। CPR यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन सीखना और यह जानना कि आपात स्थिति में मदद कहां से मिल सकती है, उपयोगी है। लोगों को हार्ट अटैक और स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों की पहचान भी सीखनी चाहिए। गंभीर संक्रमण में समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना और बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक नहीं लेना जरूरी है।
सड़क दुर्घटनाओं से बचाव के लिए हेलमेट, सीट बेल्ट और बच्चों के लिए उपयुक्त चाइल्ड सीट का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मेडिकल हिस्ट्री, एलर्जी और नियमित रूप से ली जा रही दवाओं की सूची अपडेट रखनी चाहिए, ताकि आपात स्थिति में डॉक्टरों को आवश्यक जानकारी तुरंत मिल सके। परिवार के स्तर पर अंगदान और ऊतक दान के बारे में भी चर्चा करने की जरूरत बताई गई है।
क्रिटिकल केयर में चिकित्सा विज्ञान के साथ संवेदनशीलता की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मरीज के परिवार को उसकी स्थिति और उपचार के बारे में आवश्यक जानकारी देते रहना, मरीज की गरिमा और आराम का ध्यान रखना तथा उपचार के बाद पुनर्वास की जरूरतों को समझना महत्वपूर्ण है। अस्पताल से छुट्टी के बाद भी कई मरीजों को पौष्टिक आहार, फिजियोथेरेपी, पुनर्वास और मानसिक सहयोग की आवश्यकता हो सकती है।
इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन यानी ISCCM की स्थापना 9 अक्टूबर 1993 को हुई थी। इसी अवसर पर क्रिटिकल केयर के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को गंभीर बीमारी और चोट के शुरुआती संकेत पहचानने तथा समय पर चिकित्सा सहायता लेने के लिए जागरूक करना है।
संदेश स्पष्ट है—जब हर सेकंड कीमती हो, तब जागरूकता भी जीवन रक्षक साबित हो सकती है। समय पर लक्षण पहचानना, तुरंत इमरजेंसी सहायता लेना, CPR की जानकारी रखना और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपचार पूरा करना गंभीर परिस्थितियों में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।