25 साल की उम्र में किडनी फेल, दुर्ग के अस्पताल में सफल ट्रांसप्लांट से जगी नई उम्मीद

जांजगीर-चांपा निवासी 25 वर्षीय युवक का दुर्ग स्थित आरोग्यम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। कम उम्र में किडनी की गंभीर बीमारी सामने आने के बाद ट्रांसप्लांट से बेहतर जीवन की उम्मीद जगी है। इस प्रक्रिया में किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. नवीन राम दारुका और किडनी ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉ. आर. के. साहू सहित विशेषज्ञ टीम शामिल रही। डॉक्टरों ने युवाओं को किडनी की सेहत के प्रति सतर्क रहने और समय-समय पर जांच कराने की सलाह दी है।

Nov 3, 2026 - 08:18
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25 साल की उम्र में किडनी फेल, दुर्ग के अस्पताल में सफल ट्रांसप्लांट से जगी नई उम्मीद

UNITED NEWS OF ASIA. रोहितास सिंह भुवाल, दुर्ग l छत्तीसगढ़ में किडनी की गंभीर बीमारी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें महज 25 साल की उम्र में युवक की किडनी ने काम करना बंद कर दिया। जांजगीर-चांपा निवासी इस युवक का दुर्ग स्थित आरोग्यम सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। कम उम्र में गंभीर बीमारी से जूझ रहे युवक के लिए ट्रांसप्लांट के बाद बेहतर जीवन की नई उम्मीद जगी है। इस मामले ने एक बार फिर युवाओं में किडनी स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की जरूरत को सामने रखा है।

आमतौर पर किडनी से जुड़ी बीमारियों को बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। किडनी खराब होने के पीछे जन्मजात या आनुवंशिक बीमारियां, किडनी में सूजन, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे कई कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में बीमारी शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाती, जिसके चलते मरीज को इसकी जानकारी काफी देर से मिलती है। समय पर पहचान नहीं होने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।

जब किडनी स्थायी रूप से काम करना बंद कर देती है, तब मरीज की स्थिति के अनुसार डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता पड़ सकती है। उपयुक्त मरीजों के लिए ट्रांसप्लांट उपचार का एक महत्वपूर्ण विकल्प है। जांजगीर-चांपा के 25 वर्षीय युवक का ट्रांसप्लांट भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रक्रिया रही। हालांकि, ट्रांसप्लांट के बाद मरीज की सेहत और रिकवरी की स्थिति नियमित चिकित्सकीय निगरानी पर निर्भर करती है।

इस किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़ी विशेषज्ञ टीम में किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. नवीन राम दारुका और किडनी ट्रांसप्लांट फिजिशियन डॉ. आर. के. साहू शामिल रहे। अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, विशेषज्ञों की टीम ने उपचार प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज के लिए नियमित जांच, निर्धारित दवाओं का समय पर सेवन और डॉक्टरों की सलाह का पालन करना बेहद जरूरी होता है। शरीर में प्रत्यारोपित किडनी की कार्यक्षमता बनाए रखने के लिए लंबे समय तक चिकित्सकीय निगरानी की आवश्यकता होती है।

डॉक्टरों के अनुसार, युवाओं को भी किडनी की सेहत को लेकर लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। पैरों या चेहरे पर सूजन, पेशाब की मात्रा या रंग में बदलाव और लगातार असामान्य थकान जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। हालांकि, ये लक्षण केवल किडनी की बीमारी के कारण ही हों, यह जरूरी नहीं है। इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराना आवश्यक है।

डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास होने पर समय-समय पर स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। पर्याप्त पानी पीना, संतुलित खानपान रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाओं का सेवन नहीं करना भी किडनी के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। यह मामला बताता है कि कम उम्र में भी गंभीर किडनी रोग हो सकते हैं और समय पर जांच तथा उचित उपचार से मरीजों को बेहतर जीवन की दिशा मिल सकती है।