उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में 106 हेक्टेयर वनभूमि अतिक्रमण मुक्त, 166 आरोपी चिन्हित
वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के सीतानदी कोर रेंज में वनभूमि अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई कर करीब 106 हेक्टेयर क्षेत्र को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। कार्रवाई में चार वन प्रभागों की महिला वन अधिकारियों और कर्मचारियों ने अहम भूमिका निभाई। ISRO की सैटेलाइट इमेजरी और DGPS आधारित ड्रोन मैपिंग से अतिक्रमित क्षेत्र का सीमांकन किया गया। मामले में 166 आरोपियों को चिन्हित किया गया है, जिनमें 40 की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और वन्यजीव आवासों के संरक्षण के लिए उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के सीतानदी कोर रेंज में बड़ी कार्रवाई की गई। अभियान के तहत करीब 106 हेक्टेयर अतिक्रमित वनभूमि को मुक्त कराया गया। जिला प्रशासन और पुलिस के सहयोग से की गई इस कार्रवाई में धमतरी, गरियाबंद, कांकेर और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की महिला वन अधिकारियों और कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रदेश की वन संपदा और वन्यजीव आवासों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील वन क्षेत्रों में अतिक्रमण के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई के साथ आधुनिक तकनीक के माध्यम से निगरानी और मुक्त कराई गई भूमि के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने अभियान में महिला वनबल की भूमिका की सराहना करते हुए इसे वन संरक्षण के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।
वन विभाग के अनुसार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले चार वर्षों से अतिक्रमण के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इस अवधि में विभिन्न क्षेत्रों में 1,000 हेक्टेयर से अधिक वनभूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। सीतानदी कोर रेंज में की गई वर्तमान कार्रवाई को इसी अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी बताया गया है। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार संबंधित क्षेत्र में वर्ष 2011-13 के दौरान करीब 45 हेक्टेयर अतिक्रमण दर्ज था, जो बाद में बढ़कर लगभग 106 हेक्टेयर तक पहुंच गया।
अतिक्रमण के विस्तार की सटीक पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया। USTR द्वारा ISRO की सैटेलाइट इमेजरी और DGPS आधारित ड्रोन मैपिंग के माध्यम से क्षेत्र का वैज्ञानिक अध्ययन कराया गया। अलग-अलग वर्षों की सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण कर वन क्षेत्र में हुए बदलावों का आकलन किया गया। इसके बाद ड्रोन सर्वे के जरिए अतिक्रमित भूमि का सीमांकन किया गया। विभाग के अनुसार इस मामले में कुल 166 आरोपियों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से 40 लोगों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। वैज्ञानिक साक्ष्यों, मैदानी अभिलेखों और उपलब्ध कानूनी दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है।
अतिक्रमण हटाने के बाद वनभूमि के पारिस्थितिक पुनर्स्थापन का कार्य भी शुरू किया गया है। इसके तहत कंटूर ट्रेंच निर्माण, वर्षाजल संचयन, मृदा-नमी संरक्षण और भू-जल पुनर्भरण से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। इसके साथ ही करीब 1,500 पौधों का रोपण किया जा रहा है। वन विभाग का उद्देश्य क्षेत्र की प्राकृतिक वनस्पति को पुनर्जीवित कर वन्यजीव आवास को उसके प्राकृतिक स्वरूप में बहाल करना है।
मुक्त कराया गया क्षेत्र हाथी कॉरिडोर का हिस्सा है और महानदी के उद्गम क्षेत्र के निकट स्थित है। वन विभाग के अनुसार इस क्षेत्र का संरक्षण वन्यजीवों की आवाजाही, जल संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। अभियान के दौरान धमतरी, गरियाबंद, कांकेर और उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की महिला वन अधिकारियों और वनकर्मियों ने दुर्गम परिस्थितियों में कार्रवाई संभाली। घुरावाड़, बरबंधा और भुरसीडोंगरी के ग्रामीणों का भी अभियान में सहयोग मिला। वन मंत्री ने अधिकारियों को मुक्त कराए गए क्षेत्र की लगातार निगरानी करने और वन एवं वन्यजीव क्षेत्रों में अतिक्रमण के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं।