हाल ही में एक बीमार पहाड़ी कोरवा महिला को अस्पताल ले जाने के लिए परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीणों के मुताबिक, महिला की तबीयत बिगड़ने पर 108 एंबुलेंस को फोन किया गया, लेकिन बम्हनी नाले पर पुलिया नहीं होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। इसके बाद परिजनों ने महिला को बांस की झेलेगी में लिटाया और दो लोगों की मदद से उसे करीब 3 किलोमीटर तक कंधे पर लेकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से उसे अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच की चुनौती को सामने ला दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि बम्हनी नाला सामान्य दिनों में किसी तरह पार किया जा सकता है, लेकिन बारिश के दौरान पानी बढ़ने से रास्ता बेहद मुश्किल हो जाता है। ऐसी स्थिति में सबसे ज्यादा परेशानी मरीजों, बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को होती है। ग्रामीणों के अनुसार, किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने पर परिवार को अस्पताल जाने से पहले यह चिंता करनी पड़ती है कि नाला कैसे पार किया जाएगा और एंबुलेंस गांव तक पहुंच पाएगी या नहीं।
पुलिया निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। बम्हनी नाले के किनारे दो दर्जन से अधिक ग्रामीण हाथों में थाली लेकर खड़े दिखाई दिए। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने वर्षों से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने सड़क और पुलिया की समस्या रखी है। जनदर्शन में भी आवेदन दिए गए और चुनाव के दौरान भी इस मुद्दे को उठाया गया। ग्रामीणों के अनुसार, हर बार उन्हें उम्मीद और आश्वासन मिला, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थायी समाधान नहीं हो सका। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने हाथ में थाली लेकर अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचाने की कोशिश की।
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग किसी बड़े प्रोजेक्ट की नहीं, बल्कि गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाली बुनियादी सुविधा की है। उनका कहना है कि पुलिया बनने से बारिश के दौरान आवागमन सुगम हो सकता है और एंबुलेंस, स्कूल वाहन तथा जरूरी सामान लेकर आने-जाने वाले वाहनों की पहुंच बेहतर हो सकती है। क्षेत्र में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा परिवार भी रहते हैं, इसलिए ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं की समस्या के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान बच्चों के स्कूल जाने, परिवारों तक राशन और जरूरी सामान पहुंचने तथा बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में लगातार परेशानी होती है। उनका कहना है कि नाले पर पुलिया का निर्माण केवल आवागमन की सुविधा नहीं देगा, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की जरूरतों तक पहुंच को भी आसान बनाएगा।
अब ग्रामीणों की मांग है कि बम्हनी नाले पर जल्द पुलिया का निर्माण कराया जाए और सड़क संपर्क को बेहतर किया जाए। जब तक स्थायी पुलिया का निर्माण नहीं होता, तब तक बारिश के दौरान मरीजों और ग्रामीणों के आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग भी उठाई जा रही है। सरगवां से सामने आई मरीज को कंधे पर ले जाने और थाली लेकर प्रदर्शन करने की तस्वीरों के बाद अब नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।