कटोरा तालाब CA ऑफिस चोरी का खुलासा, 30 घंटे में दो आरोपी गिरफ्तार

रायपुर के कटोरा तालाब स्थित एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) कार्यालय में हुई 8 लाख रुपये की चोरी का पुलिस ने 30 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 7.80 लाख रुपये बरामद किए गए। गिरफ्तार आरोपियों में एक पूर्व कर्मचारी भी शामिल है, जिसने नौकरी छोड़ने के बाद वारदात को अंजाम देने की साजिश रची थी।

Jul 24, 2026 - 11:55
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कटोरा तालाब CA ऑफिस चोरी का खुलासा, 30 घंटे में दो आरोपी गिरफ्तार

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l रायपुर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित कटोरा तालाब में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) कार्यालय में हुई लाखों रुपये की चोरी के मामले में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए महज 30 घंटे के भीतर पूरे प्रकरण का खुलासा कर दिया। इस कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उनके कब्जे से चोरी की गई 7 लाख 80 हजार रुपये की नकदी भी बरामद कर ली है। इस सफलता को राजधानी पुलिस की त्वरित जांच और तकनीकी साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग का परिणाम माना जा रहा है।

यह चोरी कटोरा तालाब स्थित तारवानी एंड एसोसियेट्स कार्यालय में हुई थी। कार्यालय से करीब 8 लाख रुपये नकद चोरी होने के बाद सिविल लाइन थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में विशेष टीम गठित की गई, जिसने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य और संदिग्धों की गतिविधियों का बारीकी से विश्लेषण किया।

जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिनके आधार पर दो संदिग्धों तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ में दोनों ने चोरी की वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान उमेश पोर्ते और लक्ष्मीनारायण ध्रुव के रूप में हुई है। इनमें से उमेश पोर्ते पहले इसी कार्यालय में कार्यरत था और कुछ समय पहले नौकरी छोड़ चुका था। पुलिस के अनुसार कार्यालय की आंतरिक व्यवस्था और नकदी रखने के स्थान की जानकारी होने के कारण उसने अपने साथी के साथ मिलकर चोरी की योजना बनाई।

पुलिस जांच में सामने आया कि पूर्व कर्मचारी होने के कारण आरोपी को कार्यालय के अंदर की गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी थी। इसी जानकारी का फायदा उठाकर उसने वारदात को अंजाम दिया। चोरी के बाद दोनों आरोपी फरार हो गए थे, लेकिन पुलिस ने लगातार निगरानी और तकनीकी जांच के जरिए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

गिरफ्तारी के बाद आरोपियों के कब्जे से 7 लाख 80 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। शेष राशि के संबंध में भी पुलिस पूछताछ कर रही है और मामले की विस्तृत जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि बरामद नकदी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर प्रकरण को और मजबूत किया जाएगा।

आरोपी उमेश पोर्ते का आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार वह पूर्व में बिलासपुर जिले में मारपीट के मामलों में जेल जा चुका है। पुराने आपराधिक इतिहास को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह किसी अन्य संगठित अपराध या चोरी की घटनाओं में शामिल रहा है या नहीं।

सिविल लाइन थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 331(4) और 305 के तहत अपराध दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की है। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस मामले को सुलझाने के लिए तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज की जांच, संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर और लगातार पूछताछ जैसी विभिन्न जांच प्रक्रियाओं का सहारा लिया गया। इसी वजह से कम समय में आरोपियों तक पहुंचना संभव हो सका।

इस कार्रवाई से यह भी स्पष्ट हुआ कि किसी भी संस्थान में कार्यरत कर्मचारियों के रिकॉर्ड का उचित सत्यापन और सुरक्षा व्यवस्था को समय-समय पर मजबूत करना आवश्यक है। विशेष रूप से जिन कर्मचारियों ने संस्था छोड़ दी हो, उनके एक्सेस और संवेदनशील जानकारी से जुड़े सभी अधिकार तुरंत समाप्त किए जाने चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की संभावना कम हो सके।

कार्यालयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में सीसीटीवी कैमरे, डिजिटल सुरक्षा प्रणाली, नकदी के सुरक्षित भंडारण और नियमित सुरक्षा ऑडिट जैसी व्यवस्थाएं भी इस प्रकार के अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। पुलिस ने व्यापारियों और संस्थानों से भी सुरक्षा संबंधी सावधानियां अपनाने की अपील की है।

राजधानी रायपुर में हुई इस हाई-प्रोफाइल चोरी का 30 घंटे के भीतर खुलासा पुलिस की सक्रियता और प्रभावी जांच का उदाहरण माना जा रहा है। चोरी की अधिकांश राशि की बरामदगी से पीड़ित पक्ष को भी बड़ी राहत मिली है। पुलिस का कहना है कि यदि इस मामले से जुड़े अन्य तथ्य या सहयोगी सामने आते हैं तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि गंभीर आर्थिक अपराधों में आधुनिक तकनीक, सतर्क जांच और त्वरित समन्वय के माध्यम से कम समय में भी प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।