रायपुर में तेज डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग, गणेश विसर्जन झांकी में ब्रेथ एनालाइजर जांच की अपील

रायपुर में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज सिंह ठाकुर ने धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों में तेज आवाज वाले डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने गणेश विसर्जन झांकी में शामिल सदस्यों की ब्रेथ एनालाइजर से जांच, नशे में पाए जाने वालों पर कार्रवाई और पारंपरिक वाद्य यंत्रों व लोकनृत्यों को बढ़ावा देने की मांग को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है।

Sep 16, 2026 - 09:24
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रायपुर में तेज डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग, गणेश विसर्जन झांकी में ब्रेथ एनालाइजर जांच की अपील

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर में गणेश विसर्जन सहित धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों के दौरान तेज आवाज में बजने वाले डीजे और साउंड सिस्टम को लेकर एक बार फिर मांग उठी है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता, अधिवक्ता एवं पूर्व सदस्य छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल मनोज सिंह ठाकुर ने राजधानी में अत्यधिक तीव्र ध्वनि और कंपन पैदा करने वाले डीजे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में पुलिस महानिदेशक, पुलिस कमिश्नर रायपुर, संभागीय आयुक्त, कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन भेजकर प्रशासनिक स्तर पर सख्त कदम उठाने की मांग की है। रायपुर में गणेशोत्सव के दौरान तेज आवाज वाले डीजे को लेकर प्रशासन और पुलिस पहले भी कार्रवाई कर चुके हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार निर्धारित ध्वनि सीमा से अधिक आवाज में डीजे बजाने के मामलों में पुलिस ने कार्रवाई भी की है।

मनोज सिंह ठाकुर ने आगामी गणेश विसर्जन झांकी को सुरक्षित और नशामुक्त बनाने के लिए झांकी में शामिल प्रत्येक सदस्य और समिति कार्यकर्ता की ब्रेथ एनालाइजर से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि झांकी मार्ग पर प्रवेश से पहले शराब के सेवन की जांच की व्यवस्था होनी चाहिए। इसके अलावा प्रमुख चौराहों और संवेदनशील मार्गों पर पुलिस बल को अल्कोहल डिटेक्शन उपकरणों के साथ तैनात करने की मांग की गई है, ताकि संदिग्ध स्थिति में तत्काल जांच की जा सके। उन्होंने नशे की हालत में पाए जाने वाले लोगों को भीड़ से अलग कर सुरक्षित तरीके से घर पहुंचाने तथा अशांति फैलाने की स्थिति में कानून के अनुसार कार्रवाई किए जाने की मांग रखी है।

ज्ञापन में तेज डीजे से होने वाले ध्वनि प्रदूषण को भी प्रमुख मुद्दा बनाया गया है। मनोज सिंह ठाकुर ने कहा कि अत्यधिक तेज आवाज और कंपन से बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गंभीर मरीजों और हृदय रोगियों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने पुराने और घनी आबादी वाले इलाकों में तेज ध्वनि से होने वाले कंपन को लेकर भी चिंता जताई है। हालांकि मकानों में दरार आने जैसी किसी घटना को लेकर अलग-अलग दावों की पुष्टि आवश्यक है। रायपुर में ध्वनि सीमा और समय संबंधी नियमों के उल्लंघन पर पुलिस की ओर से पहले भी कार्रवाई की गई है।

मनोज सिंह ठाकुर ने डीजे के विकल्प के तौर पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक वाद्य यंत्रों और लोकनृत्यों को बढ़ावा देने की मांग की है। उन्होंने गढ़वा बाजा, मांदर, झांझ, मंजीरा, दफड़ा, ताशा, निशान, मोहरी, धुमाल, बैंड-बाजा, शहनाई, शंखनाद और नगाड़ों जैसे पारंपरिक वाद्यों को आयोजनों में स्थान देने की बात कही। उनका कहना है कि इससे स्थानीय कलाकारों को मंच और रोजगार के अवसर मिल सकते हैं तथा छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

उन्होंने पंथी नृत्य, राउत नाचा, सुआ, करमा, ददरिया, गेड़ी, बस्तरिया नृत्य, गरबा, डांडिया और भांगड़ा जैसे लोकनृत्यों को भी सार्वजनिक आयोजनों में बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उनके अनुसार इससे धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में सांस्कृतिक विविधता को स्थान मिलेगा और भारी-भरकम डीजे वाहनों के कारण होने वाली यातायात संबंधी परेशानी को भी कम किया जा सकता है। रायपुर में गणेश विसर्जन के दौरान डीजे को लेकर पहले भी प्रशासनिक स्तर पर सख्ती और प्रतिबंध लागू किए जाते रहे हैं।

ज्ञापन के माध्यम से मनोज सिंह ठाकुर ने प्रशासन से ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित कराने, गणेश विसर्जन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और आयोजनों में पारंपरिक वाद्य यंत्रों तथा लोककलाओं को प्रोत्साहित करने की मांग की है। इन मांगों पर अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों द्वारा लागू नियमों तथा सुरक्षा व्यवस्था के आधार पर लिया जाएगा।