रायपुर-बिलासपुर स्मार्ट सिटी के ₹1,764 करोड़ के खर्च पर सवाल, अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने EOW में शिकायत देकर FIR की मांग की

रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में ₹1,764 करोड़ के कथित खर्च, थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट रिपोर्ट की अनुपलब्धता और संविदाकारों पर पेनाल्टी नहीं लगाए जाने को लेकर अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने EOW में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और संविदाकारों के खिलाफ FIR दर्ज करने, तकनीकी जांच कराने तथा परियोजनाओं के दस्तावेज जब्त करने की मांग की है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

Oct 9, 2026 - 17:12
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रायपुर-बिलासपुर स्मार्ट सिटी के ₹1,764 करोड़ के खर्च पर सवाल, अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने EOW में शिकायत देकर FIR की मांग की

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी मिशन परियोजनाओं में ₹1,764 करोड़ के कथित खर्च और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने साथी अधिवक्ताओं विजय राठौड़ और राघवेंद्र सिंह के साथ 9 अक्टूबर 2026 को राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW), रायपुर के समक्ष औपचारिक शिकायत पत्र प्रस्तुत किया। शिकायत में संबंधित अधिकारियों और संविदाकारों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने तथा पूरे मामले की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच कराने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) से सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेजों में रायपुर और बिलासपुर स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के लिए ₹1,764 करोड़ के फंड के शत-प्रतिशत खर्च का उल्लेख है। वहीं, शिकायत में दावा किया गया है कि केंद्र सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड में परियोजनाओं से संबंधित थर्ड-पार्टी क्वालिटी ऑडिट (TQA) और भौतिक सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध नहीं हैं। इस संबंध में शिकायतकर्ताओं ने मंत्रालय के पत्र क्रमांक K-15015/1/RTI/2026-SC-I/9210416, दिनांक 14 सितंबर 2026 का हवाला दिया है।

अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि कुछ बुनियादी परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा बीतने के बाद भी अधूरी हैं। इनमें रायपुर की मोतीबाग 24×7 वाटर सप्लाई परियोजना और कुशालपुर-संतोषी नगर ड्रेनेज परियोजना का उल्लेख किया गया है। शिकायत के अनुसार, कार्यों में कथित देरी और अनुबंध संबंधी उल्लंघनों के बावजूद संविदाकारों पर पेनाल्टी नहीं लगाई गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इससे सरकारी खजाने को नुकसान और ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचने की आशंका है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

शिकायत पत्र में EOW से स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के मूल मेजरमेंट बुक्स (MB), रनिंग बिल और फाइनल बिल सहित संबंधित अभिलेख जब्त करने की मांग की गई है। साथ ही, परियोजनाओं के भुगतान, निर्माण की गुणवत्ता, कार्यों की वास्तविक स्थिति और संविदात्मक शर्तों के पालन की जांच कराने का अनुरोध किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के संशोधित प्रावधानों तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए संबंधित लोकसेवकों और संविदाकारों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर और उनके साथियों ने बताया कि शिकायत पत्र के साथ केंद्र सरकार से प्राप्त RTI दस्तावेज भी EOW मुख्यालय में सौंपे गए हैं और इसकी पावती प्राप्त की गई है। इसके अतिरिक्त, शिकायत की विधिक प्रतियां छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव और पुलिस महानिरीक्षक को स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेजे जाने की जानकारी दी गई है।

शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि यदि जांच एजेंसी समयबद्ध तरीके से ठोस कार्रवाई नहीं करती है, तो वे सक्षम विशेष न्यायालय और उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। फिलहाल, यह मामला शिकायत में लगाए गए आरोपों और जांच की मांग से संबंधित है। संबंधित विभागों या जांच एजेंसी की ओर से कार्रवाई अथवा आरोपों की पुष्टि के संबंध में कोई जानकारी इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं कराई गई है।