छत्तीसगढ़ में भारतीय जैन संघटना की जैन परिवार अदालत, 14 मामलों में संवाद से समाधान की पहल

भारतीय जैन संघटना (BJS), छत्तीसगढ़ द्वारा पारिवारिक एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने के उद्देश्य से जैन परिवार अदालत का आयोजन किया गया। इसमें लगभग 14 मामलों की सुनवाई हुई। 10 से अधिक अनुभवी काउंसलर्स ने पक्षकारों की बात सुनकर आपसी संवाद, समझाइश और सहमति के जरिए विवादों को सुलझाने का प्रयास किया। संस्था का उद्देश्य परिवारों को टूटने से बचाना और सामाजिक स्तर पर सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा देना है।

Oct 9, 2026 - 17:16
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छत्तीसगढ़ में भारतीय जैन संघटना की जैन परिवार अदालत, 14 मामलों में संवाद से समाधान की पहल

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l भारतीय जैन संघटना (BJS), छत्तीसगढ़ द्वारा समाज में पारिवारिक एकता, आपसी सद्भाव और रिश्तों की मधुरता बनाए रखने के उद्देश्य से जैन परिवार अदालत का आयोजन किया गया। इस पहल के तहत लगभग 14 मामलों की सुनवाई की गई। कार्यक्रम में संबंधित पक्षों के बीच संवाद, समझाइश और आपसी सहमति के माध्यम से विवादों का समाधान निकालने का प्रयास किया गया। संस्था का उद्देश्य पारिवारिक मतभेदों को बढ़ने से रोकना और रिश्तों को टूटने से बचाने के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करना है।

भारतीय जैन संघटना छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विजय गंगवाल और प्रदेश महामंत्री विकास गोलछा ने बताया कि इस पहल में संस्था के संस्थापक शांतिलाल मुथा सहित 10 से अधिक अनुभवी काउंसलर्स ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। काउंसलर्स ने विवाद से जुड़े सभी पक्षों की बातें धैर्यपूर्वक सुनीं और आपसी मतभेदों को समझने के बाद उन्हें सहमति के रास्ते पर लाने का प्रयास किया। इस दौरान पारिवारिक रिश्तों में विश्वास बहाल करने, संवादहीनता दूर करने और आपसी समझ विकसित करने पर जोर दिया गया।

कार्यक्रम के संयोजक संजय सिंघी और सह-संयोजक मनोज लुकड़ ने बताया कि भारतीय जैन संघटना का स्पष्ट उद्देश्य समाज में उत्पन्न होने वाले पारिवारिक विवादों, आपसी मनमुटाव और अन्य मतभेदों का समाधान सामाजिक स्तर पर ही बातचीत, समझाइश और सहमति के जरिए निकालना है। संस्था का मानना है कि कई विवादों को आपसी संवाद से सुलझाया जा सकता है। ऐसे प्रयासों से पक्षकारों को एक-दूसरे की भावनाओं और परिस्थितियों को समझने का अवसर मिलता है तथा विवाद को अनावश्यक रूप से बढ़ने से रोका जा सकता है।

संस्था की पूर्व राज्य अध्यक्ष प्रमोद लूनावत ने बताया कि यदि कोई मामला पहले से न्यायालय में विचाराधीन है, तो उसमें भी पक्षकारों के बीच आपसी सहमति से समाधान निकालने का प्रयास किया जा सकता है। ऐसे मामलों में संबंधित पक्षों की सहमति और विधिसम्मत प्रक्रिया के अनुसार न्यायालयीन विवाद समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य विवादों का ऐसा समाधान तलाशना है, जिसमें सभी पक्षों की बात सुनी जाए और आपसी संबंधों को बेहतर बनाने की संभावना बनी रहे।

भारतीय जैन संघटना का मानना है कि परिवार समाज की मूल इकाई है और पारिवारिक रिश्तों में तनाव का असर पूरे परिवार पर पड़ता है। इसलिए संस्था विवादों में किसी पक्ष की हार या जीत के बजाय रिश्तों की पुनर्स्थापना, परिवारों की एकता और सामाजिक सद्भाव को प्राथमिकता देती है। संवाद और समझाइश के माध्यम से निकाला गया समाधान परिवारों को टूटने से बचाने के साथ समाज में सहयोग और विश्वास की भावना को भी मजबूत कर सकता है।

“समाज के विवाद, समाज के बीच संवाद से समाधान” की सोच के साथ भारतीय जैन संघटना छत्तीसगढ़ में सौहार्दपूर्ण विवाद समाधान की संस्कृति को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रही है। जैन परिवार अदालत की यह पहल पारिवारिक मतभेदों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने और सामाजिक स्तर पर आपसी समझ बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।