इटली में मेलोनी सरकार की अग्निपरीक्षा, चुनावी बोनस सीटों वाले प्रस्ताव पर संसद में वोटिंग; इस्तीफे की चेतावनी

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के लिए संसद में होने वाली वोटिंग अहम मानी जा रही है। चुनाव में सबसे आगे रहने वाले दल या गठबंधन को अतिरिक्त सीटें देने वाले प्रस्ताव पर संसद में मतदान होना है। प्रस्ताव के मुताबिक 42 प्रतिशत या उससे अधिक वोट हासिल करने वाले विजेता गठबंधन को निचले सदन में 70 और सीनेट में 35 बोनस सीटों का लाभ मिल सकता है। विपक्ष इस व्यवस्था का विरोध कर रहा है। मेलोनी ने कथित तौर पर प्रस्ताव पारित नहीं होने की स्थिति में इस्तीफा देने की बात कही है।

Oct 8, 2026 - 16:26
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इटली में मेलोनी सरकार की अग्निपरीक्षा, चुनावी बोनस सीटों वाले प्रस्ताव पर संसद में वोटिंग; इस्तीफे की चेतावनी

UNITED NEWS OF ASIA. इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार के लिए संसद में होने वाली एक अहम वोटिंग राजनीतिक अग्निपरीक्षा बन गई है। चुनाव में जीतने वाले दल या गठबंधन को अतिरिक्त सीटों का लाभ देने वाले प्रस्ताव पर इटली की संसद में मतदान होना है। इस प्रस्ताव को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। प्रस्ताव के तहत चुनाव में सबसे आगे रहने वाले दल या गठबंधन को संसद में बोनस सीटें देने की व्यवस्था की बात कही गई है, जिसे सरकार राजनीतिक स्थिरता से जोड़कर देख रही है।

प्रस्ताव के मुताबिक अगर कोई पार्टी या गठबंधन कम से कम 42 प्रतिशत वोट हासिल करके चुनाव में सबसे आगे रहता है, तो उसे निचले सदन में 70 और सीनेट में 35 बोनस सीटें मिल सकती हैं। यानी कुल 105 सीटों का बोनस प्रावधान प्रस्तावित है। हालांकि इन सीटों को मौजूदा कुल सीटों के भीतर ही बांटे जाने की बात कही गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि संसद की मौजूदा सीटों की संख्या के ऊपर 105 नई सीटें जोड़ दी जाएंगी।

इटली की संसद में कुल 600 सीटें हैं। इनमें 400 सीटें निचले सदन और 200 सीटें सीनेट की हैं। प्रस्ताव का उद्देश्य चुनाव में स्पष्ट जनादेश पाने वाले दल या गठबंधन को संसद में अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति देना बताया जा रहा है। सरकार का तर्क है कि इससे गठबंधन सरकारों को स्थिरता मिल सकती है और बार-बार सरकार गिरने की समस्या को कम किया जा सकता है।

इस व्यवस्था को आसान उदाहरण से समझें तो यदि किसी चुनाव में पार्टी A के गठबंधन को 43 प्रतिशत वोट मिलते हैं और वह सबसे आगे रहता है, जबकि पार्टी B को 35 प्रतिशत और अन्य दलों को 22 प्रतिशत वोट मिलते हैं, तो प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विजेता गठबंधन को बोनस सीटों का लाभ मिल सकता है। हालांकि वास्तविक सीटों का बंटवारा केवल वोट प्रतिशत के आधार पर सीधे नहीं होगा। चुनावी क्षेत्रों, पार्टियों की पात्रता और प्रस्ताव में निर्धारित अधिकतम सीमा जैसे प्रावधान भी लागू होंगे। उपलब्ध विवरण के अनुसार विजेता के लिए अधिकतम 220 सीटों की सीमा का भी प्रावधान है।

इस प्रस्ताव का विपक्ष जोरदार विरोध कर रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव जीतने वाले गठबंधन को बोनस सीटें देने से उसे संसद में जरूरत से ज्यादा राजनीतिक ताकत मिल सकती है। विरोधियों का कहना है कि ऐसी व्यवस्था से विजेता गठबंधन को महत्वपूर्ण फैसलों के लिए अन्य दलों के समर्थन या बातचीत की आवश्यकता कम हो सकती है। कुछ आलोचकों ने इसे लोकतांत्रिक संतुलन के लिए चुनौती भी बताया है।

मेलोनी सरकार के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने प्रस्ताव के पारित नहीं होने की स्थिति में इस्तीफा देने की चेतावनी दी है। ऐसे में संसद में होने वाली वोटिंग का परिणाम सरकार के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

इटली में राजनीतिक अस्थिरता का लंबा इतिहास रहा है। 1946 में गणराज्य बनने के बाद वहां कई सरकारें सत्ता में आईं और बदली हैं। इसी पृष्ठभूमि में मेलोनी सरकार चुनावी व्यवस्था में स्थिरता लाने के तर्क के साथ प्रस्ताव को आगे बढ़ा रही है। वहीं विपक्ष इसे सत्ता के केंद्रीकरण की दिशा में कदम बता रहा है। अब संसद में होने वाली वोटिंग से साफ होगा कि मेलोनी सरकार के इस प्रस्ताव को समर्थन मिलता है या नहीं और इसका उनकी सरकार के भविष्य पर क्या असर पड़ता है।