सूरजपुर दोहरे हत्याकांड में बड़ा फैसला, तीन आरोपियों को फांसी और एक को उम्रकैद की सजा
सूरजपुर के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कुलदीप साहू, रिंकू उर्फ फूल सिंह और चंद्रकांत चौधरी को फांसी की सजा सुनाई, जबकि आर्यन उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास की सजा दी गई। मामले में कुल छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला था, जिनमें से दो को अदालत पहले ही बरी कर चुकी है। फैसला आने के बाद सूरजपुर कोतवाली के सामने लोगों ने पटाखे फोड़कर खुशी जताई। फांसी की सजा के मामले में आगे उच्च न्यायालय की पुष्टि समेत न्यायिक प्रक्रिया बाकी है।
UNITED NEWS OF ASIA. आकाश सोनकर, सूरजपुर l सूरजपुर के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले में तीन आरोपियों को फांसी की सजा और एक आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस फैसले के बाद सूरजपुर में चर्चित रहे इस हत्याकांड को लेकर लोगों के बीच एक बार फिर चर्चा तेज हो गई। फैसले के बाद सूरजपुर कोतवाली के सामने लोगों की भीड़ जुटी और लोगों ने पटाखे फोड़कर फैसले का स्वागत किया।
यह मामला 13 अक्टूबर 2024 की उस खौफनाक रात से जुड़ा है, जब सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ तत्कालीन प्रधान आरक्षक के घर में उनकी पत्नी और बेटी की हत्या कर दी गई थी। वारदात के सामने आने के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। पुलिस जांच के बाद इस मामले में कुल छह आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा चला। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई।
गुरुवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश आनंद प्रकाश ने मामले में फैसला सुनाया। अदालत ने कुलदीप साहू, रिंकू उर्फ फूल सिंह और चंद्रकांत चौधरी को फांसी की सजा सुनाई। वहीं आर्यन उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास की सजा दी गई। मामले में शामिल दो अन्य आरोपियों को अदालत पहले ही बरी कर चुकी है। इस तरह कुल छह आरोपियों में से चार के खिलाफ दोषसिद्धि के बाद सजा सुनाई गई, जबकि दो आरोपी अदालत से बरी हो चुके हैं।
अदालत का फैसला सामने आते ही सूरजपुर कोतवाली के सामने लोगों की भीड़ जुट गई। लोगों ने पटाखे फोड़कर खुशी का इजहार किया और अदालत के फैसले का स्वागत किया। दोहरे हत्याकांड के बाद से ही स्थानीय लोगों में इस मामले को लेकर काफी आक्रोश और चिंता देखी गई थी। ऐसे में फैसला आने के बाद लोगों ने इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
इस पूरे मामले में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भी कानूनी प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। मौत की सजा के मामलों में उच्च न्यायालय की पुष्टि समेत आगे की न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया जाना होता है। इसलिए अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को अंतिम निष्पादन से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
सूरजपुर का यह दोहरा हत्याकांड लंबे समय तक जिले में चर्चा का विषय रहा। तत्कालीन प्रधान आरक्षक के परिवार से जुड़ी इस वारदात ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए थे। अब फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले में तीन आरोपियों को फांसी और एक को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद मामले में न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ है। आगे उच्च न्यायालय में होने वाली कार्रवाई और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं पर नजर रहेगी।