कबीरधाम की 144 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त घोषित, सरपंचों और मितानिनों का हुआ सम्मान
कबीरधाम जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 144 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किए जाने पर सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कवर्धा के वीर सावरकर भवन में आयोजित कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू ने पंचायत प्रतिनिधियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि वर्ष 2025 में निर्धारित छह सूचकांकों के आधार पर इन पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया। कार्यक्रम में टीबी उन्मूलन के प्रयासों को मजबूत करने के लिए ‘श्रेय जोश टीम’ का शुभारंभ भी किया गया। वर्ष 2026 में अधिक से अधिक ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा। कबीरधाम जिले में टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 144 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किए जाने पर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। स्थानीय वीर सावरकर भवन, कवर्धा में आयोजित इस कार्यक्रम में टीबी उन्मूलन के लिए किए गए प्रयासों को प्रोत्साहित किया गया। समारोह में टीबी मुक्त घोषित ग्राम पंचायतों के सरपंचों, पंचायत प्रतिनिधियों और मितानिनों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर टीबी उन्मूलन के प्रयासों को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से ‘श्रेय जोश टीम’ का भी शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू ने की। उन्होंने टीबी मुक्त घोषित ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष कैलाश चन्द्रवंशी, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष चन्द्रप्रकाश चन्द्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य एवं जिला स्वास्थ्य समिति की अध्यक्ष पूर्णिमा साहू सहित विभिन्न पंचायतों और नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में जिले की सभी 144 ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सरपंच प्रतिनिधि, मितानिन समन्वयक और मितानिनों ने सहभागिता की।
वर्ष 2025 में 144 पंचायतें टीबी मुक्त घोषित
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.के. तुरे ने बताया कि कबीरधाम जिले में वर्ष 2025 के दौरान कुल 470 ग्राम पंचायतों में से 144 ग्राम पंचायतों को निर्धारित छह सूचकांकों के आधार पर टीबी मुक्त घोषित किया गया। इन मानकों में प्रति एक हजार जनसंख्या पर कम से कम 30 लोगों की टीबी जांच, प्रति एक हजार जनसंख्या पर एक या शून्य टीबी प्रकरण, दवा संवेदनशीलता की जांच और निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत शत-प्रतिशत भुगतान शामिल हैं। इसके अलावा उपचार की सफलता दर न्यूनतम 85 प्रतिशत होना तथा प्रत्येक टीबी मरीज के लिए पोषण आहार उपलब्ध कराने वाले निक्षय मित्र की व्यवस्था भी निर्धारित मानकों में शामिल है।
डॉ. तुरे ने बताया कि वर्ष 2023 से 2025 के दौरान 13 ग्राम पंचायतों को स्वर्ण पदक के लिए नामांकित कर प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। वर्ष 2026 में अधिक से अधिक ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जिले की शेष पंचायतों में अभियान को गति देने के लिए कलेक्टर के निर्देशानुसार सभी चार विकासखंडों में क्लास-1 अधिकारियों को टीबी नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। ये अधिकारी अपने-अपने विकासखंडों में संचालित गतिविधियों की निगरानी करेंगे।
समय पर जांच और उपचार पर जोर
कार्यक्रम में टीबी की समय पर पहचान, नियमित जांच, उपचार और जनभागीदारी के महत्व पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि निक्षय पोषण योजना का प्रभावी क्रियान्वयन, जागरूकता और समुदाय की सक्रिय सहभागिता जिले को टीबी मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पंचायत प्रतिनिधियों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों से अभियान में सक्रिय सहयोग करने की अपील की गई।
‘श्रेय जोश टीम’ का शुभारंभ
समारोह में टीबी उन्मूलन के प्रयासों को जमीनी स्तर से जिला स्तर तक सशक्त बनाने के लिए ‘श्रेय जोश टीम’ का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में माय भारत के पंजीकृत स्वयंसेवक छात्र-छात्राओं को भी टीबी से संबंधित जानकारी देकर जागरूक किया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. डी.के. तुरे के निर्देशन में जिला क्षय अधिकारी, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, जिला नोडल एनसीडी तथा जिला क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
समारोह के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों, मितानिनों और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त प्रयासों को सम्मान दिया गया। साथ ही वर्ष 2026 में अधिक से अधिक ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने और कबीरधाम जिले में टीबी उन्मूलन अभियान को प्रभावी बनाने का संकल्प लिया गया।