हल्का परगना गुरवंडी में हर्षोल्लास से मनाया गया पुनांग तिन्दाना पंडुम, 29 ग्रामों के ग्रामीणों ने निभाई परंपरा

कांकेर के हल्का परगना गुरवंडी में आदिवासी समाज का पारंपरिक पर्व पुनांग तिन्दाना पंडुम यानी नवा खाई परब हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। आयोजन में 29 ग्रामों के गायता, पटेल, महिला-पुरुष और युवक-युवतियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। पर्व के दौरान नई फसल और पेन पुरखों का स्मरण करते हुए सामाजिक एकता, शिक्षा और संस्कृति संरक्षण का संकल्प लिया गया।

Sep 20, 2026 - 17:23
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हल्का परगना गुरवंडी में हर्षोल्लास से मनाया गया पुनांग तिन्दाना पंडुम, 29 ग्रामों के ग्रामीणों ने निभाई परंपरा

UNITED NEWS OF ASIA. राजेंद्र मंडावी, कांकेर l परगना गुरवंडी में आदिवासी समाज का पावन पर्व पुनांग तिन्दाना पंडुम यानी नवा खाई परब पारंपरिक रीति-रिवाजों और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर हल्का परगना क्षेत्र के 29 ग्रामों से सामाजिक पदाधिकारी, गायता, पटेल, महिला-पुरुष, युवक-युवतियां और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन एकत्रित हुए। सामूहिक रूप से मनाए गए इस पर्व में आदिवासी समाज की पारंपरिक मान्यताओं, कृषि संस्कृति और प्रकृति के प्रति आस्था की झलक देखने को मिली।

कार्यक्रम में परगना मांझी धनसाय दुग्गा, ग्राम पटेल लक्ष्मण दुग्गा, गायता सत्तेर दुग्गा, पेन पुजारी गीतेश दुग्गा सहित बिसाऊ दुग्गा, नरेंद्र दुग्गा, हीरालाल दुग्गा, मनीराम गोटा, शिवप्रसाद कोवाची और रामजी दुग्गा सहित 29 ग्रामों के सामाजिक पदाधिकारी एवं ग्रामीणजन मौजूद रहे। सभी ने पर्व की परंपराओं में सहभागिता निभाई और सामुदायिक एकता के साथ आयोजन को संपन्न किया।

पुनांग तिन्दाना पंडुम को आदिवासी समाज की कृषि संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के प्रति आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। पर्व के दौरान समाजजनों ने नई फसल के अन्न को ग्रहण करने से पहले पेन पुरखों का स्मरण किया और उन्हें नमन किया। इसके साथ ही प्रकृति शक्ति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए क्षेत्र और समाज की सुख-समृद्धि के लिए कामना की गई। ग्रामीणों ने अच्छी फसल, परिवारों में धन-धान्य और खुशहाली की कामना भी की।

आयोजन के दौरान सामाजिक एकता, शिक्षा और जागरूकता को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। समाजजनों ने कहा कि पारंपरिक पर्व केवल धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनके माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सामाजिक व्यवस्था, रीति-रिवाजों और प्रकृति के साथ संबंध की जानकारी मिलती है। ऐसे आयोजनों से बच्चों और युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का अवसर मिलता है।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने बच्चों को शिक्षित करने, समाज में आपसी एकता को मजबूत करने तथा आदिवासी संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संकल्प लिया। समाजजनों ने कहा कि बदलते समय के साथ अपनी परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रकृति और कृषि आधारित जीवनशैली से जुड़े पर्व समाज में सामुदायिक भावना को मजबूत करने का माध्यम भी हैं।

इस अवसर पर सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग, जिला उत्तर बस्तर कांकेर के जिला सचिव राजेश गोटा ने समस्त क्षेत्रवासियों, किसान भाई-बहनों, माताओं-बहनों और युवा साथियों को पुनांग तिन्दाना पंडुम यानी नवा खाई परब की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पर्व को सामाजिक एकता, प्रकृति के सम्मान और सांस्कृतिक संरक्षण का प्रतीक बताया। उन्होंने समाजजनों से अपनी संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने तथा नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का आह्वान किया। 29 ग्रामों की सहभागिता के साथ आयोजित इस पर्व ने सामुदायिक एकता और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया।