पुनांग तिन्दाना पंडुम पर छविन मंडावी ने क्षेत्रवासियों को दी शुभकामनाएं
कांकेर में पुनांग तिन्दाना पंडुम यानी नवा खाई परब के अवसर पर सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग, जिला उत्तर बस्तर कांकेर के ब्लॉक अध्यक्ष छविन मंडावी ने क्षेत्रवासियों, किसानों, माताओं-बहनों और युवाओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पर्व को आदिवासी संस्कृति, कृषि, प्रकृति और नई फसल के सम्मान से जुड़ा महत्वपूर्ण तिहार बताया।
UNITED NEWS OF ASIA. राजेंद्र मंडावी, कांकेर। पुनांग तिन्दाना पंडुम अर्थात नवा खाई परब के अवसर पर सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग, जिला उत्तर बस्तर कांकेर के ब्लॉक अध्यक्ष छविन मंडावी ने समस्त क्षेत्रवासियों, किसान भाई-बहनों, माताओं-बहनों और युवाओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि नवा खाई पर्व आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, संस्कृति, प्रकृति और कृषि जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण तिहार है। यह पर्व नई फसल के अन्न के प्रति सम्मान और अन्नदाता किसानों के योगदान को रेखांकित करता है।
छविन मंडावी ने कहा कि नवा खाई केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह अपनी परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का भी महत्वपूर्ण समय है। इस अवसर पर नई फसल के अन्न को ग्रहण करने की परंपरा के साथ पेन पुरखों का स्मरण किया जाता है और प्रकृति शक्ति के प्रति आभार व्यक्त किया जाता है। आदिवासी समाज की जीवनशैली में प्रकृति, खेती और सामुदायिक एकता का विशेष महत्व रहा है और नवा खाई पर्व इन्हीं मूल भावनाओं को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने पेनशक्ति एवं पेन पुरखों से प्रार्थना करते हुए क्षेत्र के सभी परिवारों में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि किसानों के खेतों में भरपूर फसल हो, हर परिवार में शांति और समृद्धि बनी रहे तथा समाज में शिक्षा, एकता और जागरूकता निरंतर बढ़ती रहे। उन्होंने क्षेत्रवासियों से पर्व को आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाने की अपील भी की।
छविन मंडावी ने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने समाज के लोगों से अपील की कि नवा खाई पर्व के अवसर पर बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता देने, सामाजिक एकता बनाए रखने और अपनी सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लें। इसके साथ ही उन्होंने प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण को भी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की परंपराएं प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने का संदेश देती हैं। ऐसे पर्व समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ सामूहिक जिम्मेदारियों की याद भी दिलाते हैं। नवा खाई के माध्यम से नई फसल, किसान, प्रकृति और पेन पुरखों के प्रति सम्मान की भावना व्यक्त की जाती है।
अंत में छविन मंडावी ने पुनांग तिन्दाना पंडुम यानी नवा खाई परब की समस्त क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सभी के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। उन्होंने अपने संदेश का समापन “जोहार, सेवा जोहार एवं पुरूड़ जोहार” के साथ किया।