बैठक में अधिकारियों ने प्रधानमंत्री राहत योजना के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की। निजी अस्पतालों में योजना से संबंधित कार्यों को व्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए हेल्प डेस्क काउंटर स्थापित करने के निर्देश दिए गए। इन हेल्प डेस्क के माध्यम से योजना से संबंधित जानकारी, मरीजों के पंजीयन और आवश्यक प्रक्रिया को सुचारू बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है। अस्पतालों को निर्देशित किया गया कि योजना के अंतर्गत आने वाले पात्र मरीजों को प्रक्रिया के दौरान अनावश्यक परेशानी न हो और उन्हें समय पर आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
बैठक में दुर्घटना में घायल मरीजों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि निजी अस्पतालों में दुर्घटना में घायल होकर पहुंचने वाले पात्र मरीजों को प्राथमिकता के साथ प्रधानमंत्री राहत योजना में ब्लॉक किया जाए, ताकि उन्हें योजना का लाभ समय पर मिल सके। दुर्घटना के बाद मरीज को तत्काल चिकित्सा सुविधा की आवश्यकता होती है, ऐसे में योजना से जुड़ी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं हो, इस पर विशेष जोर दिया गया।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान योजना के प्रावधानों और निर्धारित प्रक्रिया की जानकारी निजी अस्पतालों के नोडल अधिकारियों को दी गई। जिला कार्यक्रम समन्वयक, आयुष्मान भारत योजना एवं जिला सड़क सुरक्षा प्रबंधक द्वारा अधिकारियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। प्रशिक्षण में मरीजों के पंजीयन, योजना में मरीजों को शामिल करने की प्रक्रिया और प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी गई।
बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि योजना का उद्देश्य पात्र मरीजों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत समय पर सहायता और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए निजी अस्पतालों की भूमिका महत्वपूर्ण है। अस्पतालों में योजना के लिए निर्धारित व्यवस्था मजबूत होने से दुर्घटना में घायल मरीजों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी कराने में सुविधा मिल सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी निजी अस्पतालों में हेल्प डेस्क काउंटर स्थापित करने और संबंधित अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।
नोडल अधिकारियों को योजना के तहत निर्धारित नियमों और प्रक्रिया का पालन करने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों से कहा गया कि मरीजों के पंजीयन और योजना से संबंधित कार्रवाई में निर्धारित प्रावधानों का पालन किया जाए। साथ ही दुर्घटना में घायल मरीजों को त्वरित एवं बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल स्तर पर समन्वय बनाए रखा जाए।
सड़क दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को समय पर उपचार मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में उपचार के साथ योजना संबंधी औपचारिकताओं को भी निर्धारित समयसीमा में पूरा करने की आवश्यकता होती है। बैठक में इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए निजी अस्पतालों के नोडल अधिकारियों को योजना के प्रावधानों की जानकारी दी गई और उन्हें अपने-अपने अस्पतालों में व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर तुलिका प्रजापति के मार्गदर्शन में आयोजित इस बैठक का उद्देश्य जिले में प्रधानमंत्री राहत योजना की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना रहा। वहीं सीएमएचओ डॉ. डी.के. तुरे की अध्यक्षता में हुई समीक्षा के दौरान योजना के संचालन से जुड़े विषयों पर अधिकारियों के साथ चर्चा की गई। प्रशिक्षण के माध्यम से नोडल अधिकारियों को योजना के तहत उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों को समझाने का प्रयास किया गया।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से निजी अस्पतालों को निर्देशित किया गया कि योजना के पात्र लाभार्थियों को समय पर इसका लाभ दिलाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित रखें। हेल्प डेस्क की स्थापना से मरीजों और उनके परिजनों को योजना से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने में सुविधा मिल सकती है। इसके साथ ही दुर्घटना में घायल मरीजों के मामले में त्वरित कार्रवाई कर उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार योजना में ब्लॉक करने पर जोर दिया गया।
बैठक के अंत में निजी अस्पतालों के नोडल अधिकारियों को योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देशों का पालन करने और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग करने के लिए कहा गया। जिले में प्रधानमंत्री राहत योजना के माध्यम से पात्र मरीजों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग और निजी अस्पतालों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।