सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की पहल पर बस्तर संभाग में खुलेंगे 29 नए धान उपार्जन केंद्र, किसानों को मिलेगी राहत
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर संभाग के किसानों के लिए 29 नए धान उपार्जन केंद्र खोलने की अनुमति दी है। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की पहल पर खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 और आगामी वर्षों के लिए यह निर्णय लिया गया है। नए केंद्र बस्तर, कांकेर, कोंडागांव, बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर में खोले जाएंगे। इससे दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों के किसानों को गांव के नजदीक समर्थन मूल्य पर धान बेचने की सुविधा मिलेगी और परिवहन का समय व खर्च कम होगा।
UNITED NEWS OF ASIA. बस्तर l मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर संभाग के किसानों को बड़ी राहत देते हुए 29 नए धान उपार्जन केंद्र खोलने की अनुमति दी है। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप की पहल पर खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 सहित आगामी खरीफ विपणन वर्षों के लिए इन केंद्रों की अनुमति प्रदान की गई है। नए धान उपार्जन केंद्र संभाग के सभी सात जिलों में खोले जाएंगे। इससे दूरस्थ, ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों के किसानों को समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी।
बस्तर संभाग की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए नए उपार्जन केंद्रों का विस्तार किसानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब किसानों को अपने गांव या आसपास के क्षेत्र में ही धान बेचने की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे धान को उपार्जन केंद्र तक पहुंचाने में लगने वाला समय, श्रम और परिवहन खर्च कम होने की उम्मीद है। साथ ही पहले से संचालित केंद्रों पर किसानों का दबाव भी कम होगा और धान खरीदी की व्यवस्था अधिक सुगम एवं व्यवस्थित बनाने में मदद मिलेगी।
सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर संभाग के दूरस्थ गांवों में रहने वाले किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नए धान उपार्जन केंद्रों की अनुमति दिलाई गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि किसानों को धान विक्रय के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य प्राप्त करने के साथ ही नजदीकी क्षेत्र में धान बेचने की सुविधा मिले।
अनुमति प्राप्त 29 नए केंद्रों में बस्तर जिले में सबसे अधिक 11 केंद्र शामिल हैं। कांकेर और कोंडागांव में छह-छह नए केंद्र खोले जाएंगे। इसके अलावा बीजापुर में एक, सुकमा में दो, दंतेवाड़ा में एक और नारायणपुर में दो नए धान उपार्जन केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इस तरह संभाग के सभी सात जिलों के किसानों को इस निर्णय का लाभ मिलने की उम्मीद है।
बस्तर जिले में बाकेल समिति अंतर्गत बाकेल, चिउरगांव, काकरवाड़ा, धुरागांव, बागमोहलई, सतोषा, कुड़कानार, नंदपुरा और सौतपुर सहित विभिन्न क्षेत्रों में नए केंद्र प्रस्तावित हैं। कांकेर जिले में आतुरगांव, कढ़ईखोदरा, करैगांव, कारेगांव, नवागांव गोडरी और लक्ष्मीपुर पीवी-73 में केंद्र खोले जाएंगे। कोंडागांव जिले में इंगरा, भाटगांव, चलका, चिंगनार, सालेभाट और बड़गांव में नए धान उपार्जन केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
बीजापुर जिले के उसूर विकासखंड के तिम्मापुर में नया केंद्र खुलेगा। सुकमा जिले में बड़ेसेट्टी और बुड़दी को नए उपार्जन केंद्रों के लिए शामिल किया गया है। दंतेवाड़ा जिले के गीदम विकासखंड के समलूर में केंद्र स्थापित किया जाएगा। वहीं नारायणपुर जिले में हलामीमुंजमेटा और तारागांव में नए धान उपार्जन केंद्र खोले जाने की अनुमति दी गई है।
नए धान उपार्जन केंद्रों में किसानों की सुविधा के लिए आवश्यक तकनीकी और आधारभूत संसाधन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए फिंगरप्रिंट और आइरिस उपकरण लगाए जाएंगे। इसके साथ कंप्यूटर, प्रिंटर, यूपीएस, जनरेटर, इलेक्ट्रॉनिक तौल यंत्र और नमी मापक यंत्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। केंद्रों पर इंटरनेट कनेक्टिविटी, बिजली, पर्याप्त प्रकाश और पेयजल की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
धान को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त स्थान, पॉलीथिन कवर और जल निकासी जैसी व्यवस्थाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा। सहकारिता मंत्री ने संबंधित अधिकारियों को धान खरीदी शुरू होने से पहले सभी नए केंद्रों की तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रों के लिए ऊंची और समतल भूमि के चयन के साथ किसानों की सुविधा से जुड़ी अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूरी करने को कहा गया है।
नए उपार्जन केंद्र खुलने से बस्तर संभाग के दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। गांव के नजदीक धान बेचने की सुविधा मिलने से किसानों को उपज लेकर लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी। इससे परिवहन की परेशानी और खर्च में कमी आने के साथ धान खरीदी प्रक्रिया को भी अधिक सुविधाजनक बनाया जा सकेगा।
राज्य सरकार के इस निर्णय को बस्तर संभाग में किसान हितैषी व्यवस्था के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए केंद्रों के संचालन से एक ओर जहां किसानों को स्थानीय स्तर पर समर्थन मूल्य पर धान बेचने की सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर मौजूदा उपार्जन केंद्रों पर बढ़ने वाला दबाव भी कम किया जा सकेगा। प्रशासन की तैयारियों के साथ आगामी खरीफ विपणन वर्ष में किसानों को बेहतर और सुविधाजनक धान खरीदी व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में यह विस्तार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।