पिथौरा मीना बाजार में सुरक्षा पर सवाल, जर्जर झूलों से बड़े हादसे की आशंका
महासमुंद जिले के पिथौरा में श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के दौरान लगे मीना बाजार में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का दावा है कि जर्जर झूलों का संचालन बिना पर्याप्त तकनीकी जांच के किया जा रहा है। 50 फीट ऊंचे आकाश झूले की अनुमति, फिटनेस और सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। लोगों ने तकनीकी जांच, फिटनेस प्रमाणपत्र की समीक्षा और जांच पूरी होने तक संचालन पर रोक लगाने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. शिखा दास, महासमुंद l महासमुंद जिले के पिथौरा नगर में श्री जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव के अवसर पर लगाए गए मीना बाजार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक लोगों का आरोप है कि मेले में संचालित कई झूलों की स्थिति जर्जर है और उनके संचालन से पहले आवश्यक तकनीकी परीक्षण तथा सुरक्षा मानकों का समुचित पालन नहीं किया गया। ऐसे में प्रतिदिन बड़ी संख्या में पहुंच रहे बच्चों, महिलाओं और परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार नगर पंचायत से मीना बाजार के संचालन के लिए अनुमति तो प्रदान की गई, लेकिन झूलों की तकनीकी जांच, फिटनेस प्रमाणपत्र और सुरक्षा ऑडिट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सोशल मीडिया पर नगर पंचायत द्वारा जारी एक कथित अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी वायरल हो रहा है, जिसमें नागरिकों का दावा है कि लगभग 50 फीट ऊंचे आकाश झूले का उल्लेख नहीं है। इसके बावजूद उक्त झूले का संचालन किया जा रहा है। इसको लेकर लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि संबंधित झूले के लिए अनुमति नहीं दी गई थी तो उसका संचालन किस आधार पर किया जा रहा है।
नागरिकों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों ने स्थल का विस्तृत निरीक्षण किए बिना ही अनुमति जारी कर दी। लोगों का कहना है कि यदि किसी मेले को संचालन की अनुमति दी जाती है तो प्रशासन की जिम्मेदारी केवल कागजी स्वीकृति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक होता है कि वहां लगाए गए सभी झूले तकनीकी रूप से सुरक्षित हों और निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित किए जा रहे हों।
मीना बाजार में लगे झूलों की मशीनरी को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि झूलों में उपयोग किए गए मोटर, बेल्ट, वायरिंग, लोहे के ढांचे तथा अन्य यांत्रिक उपकरण पुराने और जर्जर दिखाई दे रहे हैं। उनका आरोप है कि बड़े मैदान में लगे झूलों की मशीनों में लगभग हर दिन किसी न किसी प्रकार की तकनीकी खराबी सामने आ रही है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इन झूलों का फिटनेस परीक्षण किस प्रकार किया गया और क्या वास्तव में किसी सक्षम तकनीकी एजेंसी ने इनकी जांच की थी।
स्थानीय नागरिकों ने यह भी आरोप लगाया है कि अधिकांश झूलों पर उनकी अधिकतम क्षमता का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है। न तो यह जानकारी प्रदर्शित की गई है कि एक बार में कितने लोग झूले पर बैठ सकते हैं और न ही यह बताया गया है कि झूला अधिकतम कितना भार वहन करने में सक्षम है। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी झूले पर उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक भार पड़ता है तो उसके यांत्रिक हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव बनता है, जिससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केवल झूलों की स्थिति ही नहीं बल्कि आपातकालीन प्रबंधन पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मीना बाजार में आग लगने या किसी अन्य दुर्घटना की स्थिति में तत्काल राहत और बचाव के लिए पर्याप्त व्यवस्था दिखाई नहीं देती। लोगों ने पूछा है कि क्या वहां अग्निशमन यंत्र, प्राथमिक उपचार केंद्र, एम्बुलेंस अथवा प्रशिक्षित आपातकालीन सहायता दल उपलब्ध है। यदि किसी बड़े हादसे की स्थिति उत्पन्न होती है तो तत्काल राहत कैसे उपलब्ध कराई जाएगी, इस पर भी प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
हाल के वर्षों में प्रदेश के विभिन्न मेलों और मनोरंजन स्थलों पर झूलों से जुड़े कई हादसे सामने आ चुके हैं। ऐसे मामलों में तकनीकी खामियां और सुरक्षा मानकों की अनदेखी प्रमुख कारण रही है। इसके बावजूद यदि बिना समुचित परीक्षण और सुरक्षा प्रमाणन के झूलों का संचालन कराया जा रहा है तो इसे गंभीर लापरवाही माना जा सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व की घटनाओं से सबक लेने के बजाय यदि वही गलतियां दोहराई जाएंगी तो भविष्य में किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
जनचर्चा के अनुसार बड़े मैदान स्थित मीना बाजार में प्रतिदिन किसी न किसी झूले या मशीन में तकनीकी खराबी सामने आने की बातें कही जा रही हैं। इसी कारण लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि आखिर इन झूलों का फिटनेस परीक्षण किस आधार पर किया गया। साथ ही यह भी चर्चा है कि यदि आकाश झूले को विधिवत अनुमति नहीं मिली है तो उसका संचालन तत्काल बंद किया जाना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि मीना बाजार में संचालित सभी झूलों का स्वतंत्र तकनीकी सुरक्षा ऑडिट कराया जाए। प्रत्येक झूले के फिटनेस प्रमाणपत्र, तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट, सुरक्षा मानकों और संचालन अनुमति की सार्वजनिक जांच की जाए। यदि किसी झूले के संचालन में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसके संचालन पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा संबंधित संचालकों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
लोगों ने यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक विशेष रूप से उन झूलों का संचालन बंद रखा जाए जिनकी अनुमति, फिटनेस या तकनीकी सुरक्षा को लेकर विवाद सामने आ रहा है। साथ ही प्रशासन यह भी स्पष्ट करे कि यदि जांच पूरी होने से पहले कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
स्थानीय नागरिकों ने आम लोगों से भी अपील की है कि जब तक झूलों की सुरक्षा संबंधी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक छोटे बच्चों को ऐसे झूलों पर बैठाने से बचें और सुरक्षा को प्राथमिकता दें। उनका कहना है कि मनोरंजन महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण लोगों का जीवन और सुरक्षा है।
अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हुई हैं। नागरिकों का मानना है कि यदि समय रहते सभी झूलों की निष्पक्ष तकनीकी जांच कर आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना गंभीर परिणाम ला सकती है। ऐसे में जनहित को ध्यान में रखते हुए प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई और पारदर्शी जांच की मांग लगातार तेज होती जा रही है।