नकटी भूमि आवंटन पर अकबर के सवाल, विधायक कॉलोनी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उठाया मुद्दा

पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने नकटी की सार्वजनिक उपयोग की भूमि विधायक कॉलोनी के लिए आवंटित करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि भूमि सार्वजनिक उपयोग और चारागाह की श्रेणी में है तो इसका आवंटन सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और राज्य शासन के आदेशों के विपरीत हो सकता है।

Jul 20, 2026 - 10:54
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नकटी भूमि आवंटन पर अकबर के सवाल, विधायक कॉलोनी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उठाया मुद्दा

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहम्मद अकबर ने रायपुर के ग्राम नकटी की सार्वजनिक उपयोग की भूमि को विधायक कॉलोनी के लिए आवंटित किए जाने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सार्वजनिक उपयोग अथवा चारागाह की भूमि को किसी अन्य उद्देश्य के लिए आवंटित किया जाता है, तो यह सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप है या नहीं, इसकी स्पष्टता आवश्यक है। उन्होंने इस संबंध में बयान जारी करते हुए शासन और प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

मोहम्मद अकबर का कहना है कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि के संरक्षण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के पालन में छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 10 मार्च 2011 को सभी संभागायुक्तों और कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे। इन निर्देशों में राजस्व अधिकारियों को सार्वजनिक निस्तारी भूमि की पहचान कर उसे सुरक्षित रखने तथा भविष्य में ऐसी भूमि को किसी अन्य प्रयोजन के लिए आवंटित नहीं करने के लिए कहा गया था।

अकबर ने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार रायपुर कलेक्टर द्वारा आवास एवं पर्यावरण विभाग के निर्देशों के तहत ग्राम नकटी की सार्वजनिक उपयोग और चारागाह श्रेणी की भूमि को विधायक एवं सांसद आवास निर्माण के लिए हाउसिंग बोर्ड को आवंटित करने की प्रक्रिया चल रही है। उनका कहना है कि यदि संबंधित भूमि वास्तव में सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी में आती है, तो यह मामला न्यायालय के पूर्व निर्देशों के संदर्भ में विचारणीय हो सकता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी मामले में न्यायालय की अवमानना हुई है या नहीं, इसका अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय ही करता है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शासन के पुराने निर्देश आज भी प्रभावी बताए जाते हैं, ऐसे में उनके रहते इस प्रकार की प्रक्रिया पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अकबर ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद अब तक न्यायालय की अवमानना के किसी मामले में दंडित किए जाने जैसी स्थिति सामने नहीं आई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य गठन से पहले जबलपुर हाईकोर्ट द्वारा एक मामले में कार्रवाई की गई थी, लेकिन उसके बाद ऐसी कोई घटना नहीं हुई।

उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रमुख सचिव के निर्देश अभी भी प्रभावी हैं, इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों द्वारा नकटी की चारागाह भूमि खाली कराकर हाउसिंग बोर्ड को सौंपने की तैयारी किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। इसे उन्होंने आश्चर्यजनक बताते हुए कहा कि यदि ऐसा हो रहा है तो संबंधित विभागों को पूरे मामले पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

पूर्व मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता बरती जानी चाहिए और यदि भूमि की प्रकृति को लेकर कोई विवाद या कानूनी प्रश्न है तो उसका समाधान विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि पूरे प्रकरण की स्थिति सार्वजनिक की जाए, ताकि किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक अस्पष्टता न रहे।