जानकारी के अनुसार, ग्राम बंशीताल निवासी रेवा लाल रोज की तरह सुबह जंगल की ओर गए थे। वापस घर लौटने के दौरान झाड़ियों से अचानक एक भालू बाहर आया और उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले के कारण बुजुर्ग को संभलने का मौका नहीं मिला। घटना में उनके बाएं हाथ और कूल्हे में गंभीर चोटें आईं। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मदद के लिए पहुंचे, लेकिन तब तक भालू जंगल की ओर चला गया था।
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों ने वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और घायल बुजुर्ग को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के बाद आगे के इलाज के लिए जिला अस्पताल गौरेला भेजा। अस्पताल में चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार किया जा रहा है। उनकी स्थिति को देखते हुए बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया।
भालू के हमले की खबर सामने आने के बाद बंशीताल और आसपास के गांवों में ग्रामीणों के बीच चिंता बढ़ गई है। जंगल से लगे क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणों का रोजमर्रा का काम अक्सर जंगल और उसके आसपास के इलाकों से जुड़ा रहता है। ऐसे में वन्यजीवों की मौजूदगी के कारण लोगों को सतर्क रहने की जरूरत होती है। हाल के दिनों में भी मरवाही वनमंडल क्षेत्र में भालू के हमले की घटनाएं सामने आई हैं। सितंबर 2026 में मरवाही वन परिक्षेत्र के ग्राम पंचायत नाका में बाड़ी में काम कर रही एक महिला पर भालू ने हमला किया था, जिसके बाद उसे बेहतर उपचार के लिए बिलासपुर रेफर किया गया था।
घटना के बाद वन विभाग ने बंशीताल और आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। विभाग की ओर से ग्रामीणों को मुनादी के माध्यम से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। लोगों से कहा गया है कि वे अकेले जंगल की ओर जाने से बचें और वन क्षेत्र में आवाजाही के दौरान विशेष सावधानी बरतें। किसी वन्यप्राणी की मौजूदगी दिखाई देने पर उसके करीब जाने या उसे परेशान करने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना देने की सलाह दी गई है।
मरवाही वन क्षेत्र में पहले भी भालू की गतिविधियों और हमलों को लेकर ग्रामीणों में चिंता रही है। मई 2026 में भी मरवाही वनमंडल क्षेत्र में भालू के हमले में एक ग्रामीण के घायल होने की खबर सामने आई थी। वन विभाग ने ऐसे मामलों में निगरानी और ग्रामीणों को जागरूक करने पर जोर दिया है।
बंशीताल की ताजा घटना के बाद वन विभाग की टीम क्षेत्र में स्थिति पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल घायल रेवा लाल का इलाज जिला अस्पताल गौरेला में जारी है। घटना ने एक बार फिर जंगल से लगे गांवों में मानव-वन्यजीव संघर्ष और ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वन विभाग की गश्त और ग्रामीणों की सतर्कता के जरिए ऐसी घटनाओं को रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं।