महुआ से बदली महिलाओं की तकदीर, वन धन योजना ने दिलाई आत्मनिर्भरता और रोजगार की नई पहचान

वन धन विकास केंद्र योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ की ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं को महुआ के मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। राजनांदगांव जिले के कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र की महिलाओं ने महुआ से लड्डू, कुकीज़, एनर्जी बार और अन्य उत्पाद बनाकर अपनी आय बढ़ाई है। इन उत्पादों को ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के माध्यम से बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे महिलाओं को स्थायी रोजगार और बेहतर आमदनी मिल रही है।

Aug 6, 2026 - 15:58
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महुआ से बदली महिलाओं की तकदीर, वन धन योजना ने दिलाई आत्मनिर्भरता और रोजगार की नई पहचान

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ के जंगलों में प्रचुर मात्रा में मिलने वाला महुआ अब केवल वन उपज नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं की आर्थिक मजबूती का आधार बनता जा रहा है। जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड (TRIFED) द्वारा वर्ष 2018 में शुरू की गई वन धन विकास केंद्र योजना ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में नई राह दिखाई है। इस योजना के तहत महिलाओं को महुआ के मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होने के साथ-साथ उन्हें स्वरोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं।

राजनांदगांव जिले के कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र की महिलाओं ने इस योजना का लाभ उठाकर सफलता की प्रेरक मिसाल पेश की है। पहले वे केवल जंगलों से महुआ एकत्र कर उसे कच्चे रूप में बेचती थीं, जिससे सीमित आय होती थी। प्रशिक्षण मिलने के बाद अब वे महुआ से लड्डू, कुकीज़, एनर्जी बार, स्क्वैश और अन्य उपयोगी खाद्य उत्पाद तैयार कर रही हैं। आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक और आकर्षक पैकेजिंग के कारण इन उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग बन रही है, जिससे महिलाओं की आमदनी पहले की तुलना में काफी बढ़ी है

वन धन विकास केंद्रों में महिलाओं को केवल उत्पाद निर्माण का प्रशिक्षण ही नहीं दिया जाता, बल्कि गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छ उत्पादन, पैकेजिंग, लेबलिंग, भंडारण और विपणन की भी विस्तृत जानकारी दी जाती है। इससे वे बाजार की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं और उन्हें बेहतर मूल्य भी प्राप्त हो रहा है। यह प्रशिक्षण महिलाओं को आत्मविश्वास के साथ छोटे उद्यमी के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

महुआ के मूल्यवर्धन से उसकी उपयोगिता और बाजार मूल्य दोनों में वृद्धि हुई है। पहले जहां महुआ केवल कच्चे रूप में बेचा जाता था, वहीं अब उससे तैयार लड्डू, कुकीज़, जैम, एनर्जी बार और अन्य उत्पादों ने स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा किए हैं। इससे महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के स्थायी साधन विकसित हुए हैं।

इन उत्पादों को छत्तीसगढ़ हर्बल्स के माध्यम से व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस पहल के जरिए वन आधारित प्राकृतिक और शुद्ध उत्पादों को नई पहचान मिल रही है। महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार महुआ उत्पादों के साथ वन शहद, एलोवेरा जेल, हर्बल जूस, आयुर्वेदिक चूर्ण और विभिन्न प्रकार के प्राकृतिक उत्पाद भी बाजार तक पहुंच रहे हैं। इससे आदिवासी और ग्रामीण समुदायों को बेहतर आजीविका के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र की सफलता यह साबित करती है कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और विपणन का सहयोग मिले, तो वन संपदा को आर्थिक समृद्धि का मजबूत आधार बनाया जा सकता है। वन धन विकास केंद्र योजना आज महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है। यह पहल न केवल महिलाओं की आय बढ़ा रही है, बल्कि उन्हें सम्मानजनक रोजगार, आत्मविश्वास और उद्यमिता की नई पहचान भी दिला रही है