लक्ष्मी राजवाड़े की पहल, अनाथ एवं निराश्रित बच्चों को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने बनेगी राज्यव्यापी योजना

महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले अनाथ एवं निराश्रित बच्चों के पुनर्वास, कौशल विकास और रोजगार के लिए एक्सिस बैंक एवं सामाजिक संस्था कैटलिस्ट फॉर सोशल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। राज्य सरकार इस पहल को सभी जिलों तक विस्तार देने की तैयारी कर रही है।

Aug 7, 2026 - 13:24
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लक्ष्मी राजवाड़े की पहल, अनाथ एवं निराश्रित बच्चों को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने बनेगी राज्यव्यापी योजना

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l छत्तीसगढ़ सरकार बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले अनाथ एवं निराश्रित बच्चों के भविष्य को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इसी उद्देश्य से अपने रायपुर स्थित निवास कार्यालय में एक्सिस बैंक और कैटलिस्ट फॉर सोशल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर बच्चों के पुनर्वास, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को लेकर विस्तृत चर्चा की।

बैठक के दौरान एक्सिस बैंक के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड के माध्यम से बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, व्यावसायिक एवं कौशल आधारित प्रशिक्षण देने तथा उन्हें रोजगारोन्मुख अवसरों से जोड़ने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों को संरक्षण देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि अनाथ और निराश्रित बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनका कहना था कि प्रत्येक बच्चे को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जिससे वह आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन का निर्माण कर सके और सम्मानपूर्वक समाज में अपनी पहचान बना सके।

उन्होंने बताया कि लगभग एक वर्ष पहले सामुदायिक सहयोग से बाल संरक्षण एवं बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों के सामाजिक पुनर्वास के लिए इस विशेष पहल की शुरुआत की गई थी। वर्तमान में प्रदेश के पांच जिलों में इस योजना का सफल क्रियान्वयन किया जा चुका है। सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब इस मॉडल को राज्य के सभी जिलों में लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को इसका लाभ मिल सके।

बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि आज के समय में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। बच्चों को डिजिटल शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, व्यक्तित्व विकास, करियर मार्गदर्शन और रोजगार से जुड़े व्यावहारिक कौशल भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए। इससे वे भविष्य की चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना कर सकेंगे और आर्थिक रूप से भी सशक्त बनेंगे।

लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार सामाजिक संस्थाओं, कॉर्पोरेट क्षेत्र और औद्योगिक घरानों के सहयोग से बच्चों के समग्र विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकारी और निजी संस्थाओं के साझा सहयोग से बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा और उन्हें बेहतर भविष्य की दिशा मिलेगी।

बैठक में एक्सिस बैंक के सीएसआर प्रभारी, क्षेत्रीय प्रबंधक, संस्था के संचालक दीपेश, राज्य प्रमुख जिनेश तथा बैंक के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। सभी ने इस पहल को सफल बनाने के लिए समन्वित प्रयास करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की साझेदारी से बाल देखरेख संस्थाओं में रहने वाले बच्चों को शिक्षा, कौशल, रोजगार और सम्मानजनक जीवन के नए अवसर उपलब्ध होंगे, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभा सकेंगे।