कोरबा में राखड़ डम्प से उड़ती धूल बनी ग्रामीणों की परेशानी, अंजोरीपाली के लोगों ने प्रदूषण से राहत की लगाई गुहार

कोरबा के अंजोरीपाली गांव में राखड़ डम्प से उड़ने वाली धूल के कारण ग्रामीणों को प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।

Jul 20, 2026 - 12:31
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कोरबा में राखड़ डम्प से उड़ती धूल बनी ग्रामीणों की परेशानी, अंजोरीपाली के लोगों ने प्रदूषण से राहत की लगाई गुहार

UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप राव, कोरबा l औद्योगिक नगरी कोरबा के अंजोरीपाली गांव के ग्रामीण इन दिनों राखड़ डम्प से उड़ने वाली धूल के कारण गंभीर परेशानियों का सामना कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि तेज हवा चलने पर राखड़ की महीन धूल पूरे गांव में फैल जाती है और घरों से लेकर खेतों तक हर जगह इसकी परत जम जाती है। लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण ग्रामीणों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी तेजी से सामने आने लगी हैं।

ग्रामीणों के अनुसार, राखड़ डम्प से निकलने वाली धूल हवा के साथ उड़कर सीधे घरों के आंगन, छतों, पेयजल स्रोतों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर जम जाती है। इससे रोजमर्रा की साफ-सफाई करना मुश्किल हो गया है। कई परिवारों का कहना है कि सुबह सफाई करने के कुछ ही घंटों बाद दोबारा राखड़ की परत दिखाई देने लगती है। इससे लोगों को लगातार असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों पर पड़ रहा है। धूल के कारण सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, एलर्जी, खांसी और अन्य श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में यह स्वास्थ्य के लिए और भी गंभीर खतरा बन सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि राखड़ डम्प से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए जा रहे हैं। उनका आरोप है कि नियमित रूप से पानी का छिड़काव और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं होने के कारण धूल लगातार आसपास के क्षेत्रों में फैल रही है। इससे गांव का वातावरण दूषित हो रहा है और लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।

अंजोरीपाली के ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि राखड़ डम्प से होने वाले प्रदूषण पर तत्काल प्रभावी नियंत्रण किया जाए। उन्होंने नियमित पानी के छिड़काव, डम्प क्षेत्र को सुरक्षित ढंग से ढंकने, हरित पट्टी विकसित करने तथा प्रदूषण नियंत्रण के अन्य वैज्ञानिक उपाय लागू करने की मांग की है, ताकि गांववासियों को राहत मिल सके।

ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास और उद्योगों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य की अनदेखी भी स्वीकार्य नहीं है। उनका मानना है कि उद्योगों के संचालन के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण के सभी मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए, ताकि आसपास रहने वाले लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

फिलहाल ग्रामीण प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप की उम्मीद लगाए बैठे हैं। मामले में संबंधित विभाग या जिम्मेदार एजेंसी का आधिकारिक पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।