किरेन रिजिजू का नसीरुद्दीन शाह पर तीखा हमला, ‘मेंटल क्रिमिनल’ बताकर कहा- ऐसे लोग लोकतंत्र के लिए खतरा
अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताने वाले बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। रिजिजू ने शाह को ‘मेंटल क्रिमिनल’ करार देते हुए कहा कि ऐसे विचार रखने वाले लोग लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। वहीं, नसीरुद्दीन शाह ने 28 अक्टूबर को जारी वीडियो में सरकार की नीतियों, शिक्षा संस्थानों और लोकतंत्र को लेकर सवाल उठाए थे। उनके बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के खुद को ‘दिमागी नक्सल’ बताने वाले बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए नसीरुद्दीन शाह को ‘मेंटल क्रिमिनल’ करार दिया है। रिजिजू ने कहा कि वे पहले नसीरुद्दीन शाह और उनकी अदाकारी को पसंद करते थे, लेकिन उनके विचारों के बारे में जानकर उन्हें निराशा हुई। उन्होंने ऐसे विचार रखने वाले लोगों को लोकतंत्र के लिए खतरा भी बताया।
दरअसल, नसीरुद्दीन शाह ने 28 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया था। इस वीडियो में उन्होंने खुद को गर्व के साथ ‘दिमागी नक्सल’ बताया। अभिनेता ने कहा कि उनके जैसे लोगों को एंटी-नेशनल और टुकड़े-टुकड़े गैंग जैसे नाम दिए जाते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश के लोकतंत्र, शिक्षा संस्थानों और युवाओं की हिम्मत को प्रभावित किया जा रहा है। शाह ने अपने वीडियो में सरकार की नीतियों और कामकाज पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की थी।
नसीरुद्दीन शाह के इस वीडियो के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उनके बयान पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि वे नसीरुद्दीन शाह को एक कलाकार के रूप में पसंद करते थे और उनका सम्मान भी करते थे। रिजिजू के मुताबिक, उन्हें पहले अभिनेता की सोच के बारे में जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि वे शाह को एक अच्छे कलाकार के तौर पर देखते थे, लेकिन अब उनके विचारों को जानकर उनकी राय बदल गई है।
रिजिजू ने अपनी प्रतिक्रिया में नसीरुद्दीन शाह के लिए ‘मेंटल क्रिमिनल’ शब्द का इस्तेमाल किया और कहा कि ऐसी विचारधारा वाले लोग लोकतंत्र के लिए खतरा हैं। उनके इस बयान ने पहले से जारी विवाद को और हवा दे दी है। हालांकि, यह टिप्पणी केंद्रीय मंत्री की राजनीतिक प्रतिक्रिया है, जबकि नसीरुद्दीन शाह का बयान सरकार की आलोचना के संदर्भ में आया था।
अपने वीडियो में नसीरुद्दीन शाह ने कहा था कि उन्हें अलग-अलग नामों से संबोधित किया जाता है। उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने को स्वीकार करते हुए सरकार से सवाल किया कि देश के युवाओं का मनोबल तोड़ने, शिक्षा संस्थानों को प्रभावित करने और लोकतंत्र को खतरे में डालने की कोशिशें आखिर कब तक जारी रहेंगी। उन्होंने सरकार के नेतृत्व और उसके आसपास मौजूद लोगों पर भी तीखी टिप्पणी की थी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर कलाकारों की राजनीतिक अभिव्यक्ति, सरकार की आलोचना और लोकतंत्र में असहमति के अधिकार को लेकर बहस शुरू हो गई है। एक तरफ नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी चर्चा में है, तो दूसरी तरफ किरेन रिजिजू की तीखी प्रतिक्रिया राजनीतिक बयानबाजी का नया मुद्दा बन गई है। अब देखना होगा कि इस विवाद पर अन्य राजनीतिक दलों और फिल्म जगत से आगे क्या प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।