भूटान में ग्लेशियर झील फटने से बाढ़ का खतरा, बंगाल-असम में अलर्ट; हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

भूटान की शिंताफू ग्लेशियर झील से अचानक बाढ़ आने की खबर के बाद पश्चिम बंगाल और असम के सीमावर्ती इलाकों में सतर्कता बढ़ाई गई है। संकोश नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि की आशंका जताई गई है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और राहत-बचाव की तैयारियां तेज करने की जानकारी दी है।

Oct 30, 2026 - 11:50
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भूटान में ग्लेशियर झील फटने से बाढ़ का खतरा, बंगाल-असम में अलर्ट; हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

UNITED NEWS OF ASIA. भूटान में ग्लेशियर झील से अचानक बाढ़ आने की खबर ने भारत के सीमावर्ती इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, भूटान की शिंताफू झील से पानी का तेज बहाव निकलने के बाद पश्चिम बंगाल और असम के कुछ हिस्सों में बाढ़ की आशंका जताई गई है। इस संभावित खतरे को देखते हुए प्रशासन को सतर्क रहने और नदी किनारे बसे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि झील से निकला पानी मोफू नदी के रास्ते संकोश नदी की ओर बढ़ सकता है। संकोश नदी भूटान से भारत में प्रवेश करती है और पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों तथा असम के कुछ क्षेत्रों से होकर गुजरती है। ऐसे में नदी के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने पर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए परेशानी पैदा हो सकती है। पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और असम के धुबरी जिले को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की बात कही गई है।

उपलब्ध विवरण के मुताबिक, संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए अलीपुरद्वार जिले के संवेदनशील इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाने की कार्रवाई की गई है। करीब 10 हजार लोगों को स्थानांतरित किए जाने का दावा भी किया गया है। हालांकि, इस संख्या की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। राहत एवं बचाव कार्यों के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमों की तैनाती की जानकारी भी दी गई है।

भारत-भूटान सीमा के आसपास बाढ़ के पानी के पहुंचने को लेकर भी चिंता जताई गई है। एक विशेष एडवाइजरी में ऊपरी नदी क्षेत्र में अचानक पानी बढ़ने के बाद अलीपुरद्वार और धुबरी के निचले इलाकों में जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका बताई गई है। उपलब्ध जानकारी में घटना के बाद 8 से 10 घंटे के भीतर पानी के भारत-भूटान सीमा तक पहुंचने की संभावना का उल्लेख है। ऐसे में नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की सलाह का पालन करने की जरूरत है।

पश्चिम बंगाल के कुमारग्राम क्षेत्र में भी लोगों से नदी के किनारे वाले इलाकों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील किए जाने की जानकारी सामने आई है। वन मंत्री एवं स्थानीय विधायक मनोज कुमार उरांव ने कथित तौर पर वीडियो संदेश के माध्यम से लोगों को सावधानी बरतने और प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। हालांकि, स्थिति में सुधार की खबरों के बावजूद दोनों राज्यों में सतर्कता बनाए रखने की बात कही गई है।

क्या होता है GLOF?

ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF ऐसी अचानक आने वाली बाढ़ है, जो ग्लेशियरों से बनी झीलों में जमा पानी के प्राकृतिक बांध या अवरोध के टूटने अथवा कमजोर पड़ने से उत्पन्न होती है। इस दौरान पानी बेहद तेज गति से पहाड़ी घाटियों और नदियों में बहता है। अपने साथ भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर और मलबा लेकर आने वाला यह पानी पुल, सड़क, मकान, खेत और अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा सकता है।

फिलहाल इस संभावित आपदा को लेकर सबसे जरूरी है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोग प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान दें। नदी के किनारे जाने, पुलों पर रुकने या बाढ़ के पानी के बीच से गुजरने से बचें। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों के निर्देशों का पालन करें।