पटवारी हड़ताल और अर्नब तूफान से किसान परेशान, मोती जांगड़े ने सरकार से मांगा जवाब
छत्तीसगढ़ में पटवारियों की हड़ताल के कारण किसानों के रकबा सुधार और राजस्व संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। वहीं अर्नब तूफान के प्रभाव से हुई बारिश और तेज हवाओं ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है। जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व मीडिया प्रभारी मोती जांगड़े ने भाजपा सरकार पर किसानों की समस्याओं को लेकर गंभीरता नहीं दिखाने का आरोप लगाते हुए तत्काल सर्वे, मुआवजा और वैकल्पिक राजस्व व्यवस्था की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. महासमुंद। छत्तीसगढ़ में पटवारियों की हड़ताल और अर्नब तूफान के प्रभाव से हुई बारिश एवं तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक ओर पटवारियों की हड़ताल के कारण रकबा त्रुटि सुधार और अन्य राजस्व संबंधी काम प्रभावित हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मौसम की मार से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है। धान खरीदी का समय नजदीक होने के कारण किसान रकबा सुधार को लेकर परेशान हैं। इस स्थिति को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व मीडिया प्रभारी मोती जांगड़े ने भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
मोती जांगड़े ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि प्रदेश के किसान पहले से ही खेती की बढ़ती लागत, खाद-बीज की व्यवस्था और धान खरीदी की तैयारियों को लेकर परेशान हैं। ऐसे समय में पटवारियों की हड़ताल ने उनकी समस्याओं को और बढ़ा दिया है। धान खरीदी शुरू होने से पहले किसानों को अपने रकबे में हुई त्रुटियों को सुधारने की जरूरत है, लेकिन पटवारियों के हड़ताल पर रहने के कारण उन्हें जरूरी काम कराने में परेशानी हो रही है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि जब पटवारी हड़ताल पर हैं, तब किसानों के रकबा सुधार और अन्य राजस्व कार्यों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई है?
जांगड़े ने कहा कि किसानों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक तरफ पटवारी हड़ताल के कारण सरकारी कामकाज प्रभावित है, तो दूसरी तरफ अर्नब तूफान के प्रभाव से हुई बारिश और तेज हवाओं ने खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रभावित किसानों की फसल क्षति का आकलन कौन करेगा और सर्वे की प्रक्रिया कब शुरू होगी? उन्होंने कहा कि यदि समय पर नुकसान का सर्वे नहीं किया गया, तो प्रभावित किसानों को मुआवजा मिलने में भी देरी हो सकती है।
उन्होंने प्रदेश सरकार से पटवारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर हड़ताल समाप्त कराने की पहल करने की मांग की। साथ ही कहा कि जब तक हड़ताल जारी है, तब तक किसानों के रकबा त्रुटि सुधार और जरूरी राजस्व कार्यों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि धान खरीदी के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
मोती जांगड़े ने मांग की कि तूफान से प्रभावित गांवों में तत्काल सर्वे कराया जाए और फसल नुकसान का वास्तविक आकलन कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि धान पंजीयन में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और किसानों को राहत देने की प्रक्रिया कब शुरू होगी।
उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। पटवारी हड़ताल का समाधान, रकबा सुधार की वैकल्पिक व्यवस्था और फसल क्षति का समय पर सर्वे किसानों की तत्काल जरूरत है। जांगड़े ने सरकार से इन मुद्दों पर स्पष्ट जवाब देने और प्रभावित किसानों को जल्द राहत पहुंचाने की मांग की।