किसानों के खेतों में लगे बिजली खंभों के लिए ₹10,000 मासिक किराया देने की मांग, सी.एस. कुड़ोपा ने सरकार से की पहल की अपील
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की हर्रई जनपद पंचायत के सभापति सी.एस. कुड़ोपा (चंदू भैया) ने किसानों के खेतों में स्थापित बिजली के खंभों और गुजरने वाली बिजली लाइनों के बदले उचित किराया देने की मांग की है। उन्होंने राज्य सरकार से पूरे प्रदेश में सर्वे कराकर प्रभावित किसानों की पहचान करने और प्रत्येक बिजली खंभे के लिए ₹10,000 प्रतिमाह किराया देने की व्यवस्था बनाने का आग्रह किया है।
UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञराज पटेल, छिंदवाड़ा l मध्य प्रदेश में किसानों के हितों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आया है। हर्रई जनपद पंचायत के सभापति सी.एस. कुड़ोपा (चंदू भैया) ने राज्य सरकार से मांग की है कि जिन किसानों के खेतों में बिजली के खंभे स्थापित हैं और जिनकी कृषि भूमि से बिजली की लाइनें गुजरती हैं, उन्हें भूमि के उपयोग के बदले उचित मासिक किराया दिया जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन पर बिजली के खंभे और तार होने से खेती-किसानी के काम में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में किसानों को उनकी भूमि के उपयोग के बदले आर्थिक लाभ मिलना चाहिए।
बिजली खंभों से खेती में होती है परेशानी
सी.एस. कुड़ोपा के अनुसार, खेतों में बिजली के खंभे और लाइनें होने के कारण कृषि कार्य प्रभावित हो सकते हैं। खेतों की जुताई, बुवाई, कटाई और कृषि मशीनों के संचालन के दौरान किसानों को कई बार अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है। बिजली के खंभों की मौजूदगी से खेती के लिए उपलब्ध भूमि के उपयोग में भी कठिनाई हो सकती है।
उन्होंने कहा कि किसान देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए और उन्हें उचित राहत देने के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
प्रत्येक बिजली खंभे पर ₹10,000 मासिक किराये का प्रस्ताव
सभापति सी.एस. कुड़ोपा ने मध्य प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि प्रदेशभर में सर्वे कराया जाए। इस सर्वे के माध्यम से उन किसानों की पहचान की जाए, जिनकी कृषि भूमि पर बिजली के खंभे स्थापित हैं या जिनके खेतों से बिजली की लाइनें गुजर रही हैं।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि किसानों को प्रत्येक बिजली खंभे के बदले ₹10,000 प्रतिमाह किराया देने की व्यवस्था की जाए। उनका मानना है कि इस तरह की व्यवस्था लागू होने से प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता मिल सकती है और उनकी जमीन के उपयोग के बदले उचित भुगतान सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।
यह राशि फिलहाल सी.एस. कुड़ोपा की ओर से रखी गई मांग है। इसे मध्य प्रदेश सरकार द्वारा स्वीकृत या लागू योजना नहीं माना जाना चाहिए।
बिजली बिल भरने वाले किसानों को भी मिले राहत
सी.एस. कुड़ोपा ने कहा कि किसान अपनी जरूरतों के अनुसार घरेलू, कृषि, व्यावसायिक या अन्य बिजली कनेक्शनों के बिलों का भुगतान करते हैं। ऐसे में किसानों की भूमि पर बिजली के बुनियादी ढांचे की मौजूदगी से होने वाली परेशानियों पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस मांग का उद्देश्य किसानों को उनकी भूमि के उपयोग के बदले आर्थिक लाभ दिलाना और उनकी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना है।
सरकार से सकारात्मक निर्णय लेने की अपील
सी.एस. कुड़ोपा (चंदू भैया) ने कहा कि यह मुद्दा प्रदेश के अनेक किसानों से जुड़ा है। इसलिए सरकार को इस विषय पर व्यापक स्तर पर विचार करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सर्वे की प्रक्रिया शुरू कराकर प्रभावित किसानों की पहचान की जाए और उनके हित में उचित नीति बनाने की दिशा में शीघ्र कार्रवाई की जाए।
फिलहाल, इस मांग पर मध्य प्रदेश सरकार की ओर से किसी निर्णय की जानकारी इस प्रेस विज्ञप्ति में नहीं दी गई है। अब देखना होगा कि सरकार किसानों के खेतों में स्थापित बिजली खंभों और बिजली लाइनों के बदले किराया देने की मांग पर क्या रुख अपनाती है।