तूफान में फंसी प्रसूता तक पहुंची 108 एंबुलेंस टीम, पेड़ काटकर बनाया रास्ता; पेश की मानवता की मिसाल
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के बीच 108 एंबुलेंस टीम ने साहस और तत्परता की मिसाल पेश की। ग्राम कुकरार में प्रसव पीड़ा से जूझ रही उमन बाई तक पहुंचने के लिए टीम ने रास्ते में गिरे विशाल पेड़ों को काटा और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से मार्ग तैयार किया। सुबह 6:27 बजे शुरू हुआ अभियान करीब 8:15 बजे तक चला। इसके बाद प्रसूता को मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए रवाना किया गया।
UNITED NEWS OF ASIA. राधे पटेल, गरियाबंद। चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के बीच गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में 108 एंबुलेंस टीम ने साहस, तत्परता और मानवता की मिसाल पेश की। तेज आंधी-तूफान के कारण रास्ते में विशाल पेड़ गिरने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया था। इसी दौरान ग्राम कुकरार में एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। महिला को तत्काल अस्पताल पहुंचाना जरूरी था, लेकिन बंद रास्ते के कारण एंबुलेंस का गांव तक पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था। ऐसे हालात में एंबुलेंस कर्मचारियों ने हार नहीं मानी और रास्ते में गिरे पेड़ों को काटकर प्रसूता तक पहुंचने का मार्ग तैयार किया।
जानकारी के अनुसार, आमामोरा पहाड़ी क्षेत्र के ग्राम कुकरार जाने वाले मार्ग पर चक्रवाती तूफान के प्रभाव से कई विशाल पेड़ गिर गए थे। तेज हवाओं के चलते सड़क पर जगह-जगह अवरोध पैदा हो गए थे। इसी गांव की निवासी उमन बाई, पति मोहन लाल भुंजिया को प्रसव पीड़ा होने लगी। परिजनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन्हें समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की थी। रास्ता बंद होने के कारण सामान्य तरीके से एंबुलेंस का गांव तक पहुंचना संभव नहीं दिखाई दे रहा था।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 108 एंबुलेंस टीम ने रास्ता साफ करने का निर्णय लिया। टीम के कर्मचारियों ने रास्ते में गिरे पेड़ों को काटकर हटाया और स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से एक-एक बाधा पार करते हुए आगे बढ़े। इस दौरान ग्रामीणों ने भी पूरी तत्परता से मदद की और एंबुलेंस के आवागमन के लिए रास्ता बनाने में सहयोग दिया। सामूहिक प्रयासों के बाद आखिरकार टीम प्रसूता के घर तक पहुंचने में सफल रही।
इस साहसिक अभियान में 108 एंबुलेंस के पायलट प्रकाश साहू और ईएमटी हेमंत कुमार साहू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके साथ दुर्गेश पुरेना, सीएचओ, एसएचसी ओढ़ तथा आमामोरा निवासी भुनेश्वर यादव, राजेंद्र यादव और गौरसिंह भुंजिया ने भी सहयोग किया। सभी ने मिलकर रास्ते में गिरे पेड़ों को हटाने और एंबुलेंस के लिए मार्ग तैयार करने का प्रयास किया।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 108 एंबुलेंस वाहन क्रमांक CG04 QA 2081 के माध्यम से सुबह 6:27 बजे अभियान शुरू किया गया था। दुर्गम पहाड़ी रास्ते और जगह-जगह गिरे पेड़ों के कारण टीम को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। करीब 8:15 बजे तक टीम ने रास्ते की बाधाओं को पार करते हुए प्रसूता तक पहुंचने और उसे अस्पताल ले जाने की कार्रवाई पूरी की। इसके बाद उमन बाई को एंबुलेंस से मैनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए रवाना किया गया।
प्राकृतिक आपदा के बीच 108 एंबुलेंस कर्मचारियों और स्थानीय ग्रामीणों के इस सामूहिक प्रयास ने आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की अहमियत को एक बार फिर सामने रखा। दुर्गम इलाकों में आपदा के समय समय पर चिकित्सा सहायता पहुंचाना बड़ी चुनौती होती है। कुकरार की यह घटना बताती है कि कठिन परिस्थितियों में साहस, जिम्मेदारी और सामूहिक सहयोग से जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाई जा सकती है।