2 लाख किलोमीटर चल चुकी कार को बेचना कितना सही? जानिए मेंटेनेंस खर्च और परफॉर्मेंस का पूरा सच
किसी कार का 2 लाख किलोमीटर चल जाना यह साबित नहीं करता कि अब उसे बेचना जरूरी है। गाड़ी की वास्तविक उम्र उसके रखरखाव, इंजन की स्थिति और नियमित सर्विसिंग पर निर्भर करती है। अगर कार का इंजन अच्छी स्थिति में है और उसमें बार-बार तकनीकी खराबी नहीं आ रही, तो उसे आगे भी चलाया जा सकता है। वहीं, लगातार बढ़ता रिपेयर खर्च, इंजन से धुआं, ऑयल कम होना और गियरबॉक्स की समस्या कार बेचने का संकेत हो सकते हैं। जानिए कब पुरानी कार रखना फायदेमंद है और कब उसे बेचना समझदारी होगी।
UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में पुरानी कारों को लेकर एक आम धारणा है कि अगर किसी गाड़ी का ओडोमीटर 1 लाख या 2 लाख किलोमीटर का आंकड़ा पार कर चुका है, तो उसे बेच देना ही बेहतर होता है। कई कार मालिक मानते हैं कि इतनी दूरी तय करने के बाद इंजन कमजोर हो जाता है और गाड़ी पर भारी मेंटेनेंस खर्च आने लगता है। हालांकि, यह धारणा हर कार के मामले में सही नहीं है। आधुनिक कारों की तकनीक और बेहतर निर्माण गुणवत्ता के कारण कई वाहन 2 लाख किलोमीटर चलने के बाद भी अच्छी परफॉर्मेंस दे सकते हैं।
कार की उम्र नहीं, उसकी कंडीशन है अहम
किसी कार की वास्तविक स्थिति केवल उसके ओडोमीटर की रीडिंग से तय नहीं होती। यह इस बात पर निर्भर करती है कि गाड़ी का रखरखाव किस तरह किया गया है। यदि कार की नियमित सर्विसिंग समय पर हुई है, इंजन ऑयल निर्धारित अंतराल पर बदला गया है और ब्रेक, सस्पेंशन सहित अन्य जरूरी हिस्सों की देखभाल की गई है, तो गाड़ी लंबे समय तक बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इसके विपरीत, लापरवाही से रखरखाव करने पर कम चली हुई कार में भी बड़ी तकनीकी समस्याएं आ सकती हैं।
इसलिए 2 लाख किलोमीटर का आंकड़ा पार करने के बाद तुरंत कार बेचने का फैसला नहीं करना चाहिए। यदि इंजन सामान्य आवाज के साथ चल रहा है, गाड़ी की ड्राइविंग स्मूथ है और बार-बार खराबी नहीं आ रही है, तो उसे आगे भी इस्तेमाल करना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकता है।
इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
कुछ ऐसी समस्याएं हैं, जो बताती हैं कि कार के मैकेनिकल पार्ट्स में गंभीर खराबी आ सकती है। यदि वाहन को बार-बार गैराज ले जाना पड़ रहा है और हर महीने मरम्मत पर बड़ी रकम खर्च हो रही है, तो कार की स्थिति का दोबारा आकलन करना जरूरी है। इंजन से असामान्य धुआं निकलना, साइलेंसर से ऑयल जलने जैसी गंध आना, गियर बदलने में परेशानी होना और बार-बार इंजन ऑयल का स्तर कम होना गंभीर संकेत हो सकते हैं।
इन समस्याओं के पीछे इंजन या अन्य प्रमुख हिस्सों की खराबी हो सकती है। ऐसे में केवल छोटी-मोटी मरम्मत कराते रहने के बजाय पूरी तकनीकी जांच कराना बेहतर रहता है।
कार बेचें या रखें, ऐसे करें फैसला
कार बेचने का निर्णय लेने से पहले उसकी मौजूदा रीसेल वैल्यू और संभावित मरम्मत खर्च की तुलना जरूर करें। यदि इंजन ओवरहालिंग या बड़ी रिपेयरिंग पर आने वाला खर्च कार की मौजूदा बाजार कीमत के बड़े हिस्से के बराबर है, तो उसे बेचकर दूसरी कार लेना समझदारी हो सकती है। वहीं, यदि गाड़ी अच्छी स्थिति में है और नियमित मेंटेनेंस का खर्च बजट में है, तो उसे चलाते रहना बेहतर विकल्प हो सकता है।
मैकेनिक से कराएं पूरी जांच
अंतिम फैसला लेने से पहले किसी अनुभवी और भरोसेमंद मैकेनिक से कार के इंजन कम्प्रेशन, गियरबॉक्स, सस्पेंशन और चेसिस की जांच कराएं। साथ ही सर्विस हिस्ट्री और पहले हुई बड़ी मरम्मत की जानकारी भी देखें। मैकेनिक की रिपोर्ट सकारात्मक होने पर केवल 2 लाख किलोमीटर की रीडिंग के कारण कार बेचने की जरूरत नहीं है।
कुल मिलाकर, कार की उम्र का फैसला उसके किलोमीटर से ज्यादा उसकी मौजूदा हालत और रखरखाव पर निर्भर करता है। सही जांच और खर्च का हिसाब लगाकर लिया गया फैसला ही आपकी जेब के लिए फायदेमंद साबित होगा।