डॉलर के मुकाबले 7 पैसे मजबूत हुआ रुपया, 95.19 पर पहुंचा; जानिए आम लोगों पर क्या होगा असर
भारतीय रुपया शुक्रवार, 30 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 पैसे मजबूत होकर 95.19 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को रुपया 95.26 के स्तर पर बंद हुआ था। डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट से रुपये को समर्थन मिला। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और एशियाई बाजारों में कमजोरी ने रुपये की बढ़त को सीमित रखा। रुपये की मजबूती से विदेश में पढ़ाई और यात्रा करने वालों को राहत मिल सकती है।
UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। भारतीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती दर्ज की। शुरुआती कारोबार में रुपया 7 पैसे मजबूत होकर 95.19 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को कारोबारी सत्र समाप्त होने पर रुपया 95.26 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट को रुपये की मजबूती की प्रमुख वजह माना जा रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और एशियाई बाजारों में कमजोरी के कारण रुपये की बढ़त सीमित रही।
डॉलर में कमजोरी से रुपये को मिला सहारा
विदेशी मुद्रा बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान डॉलर इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, डॉलर इंडेक्स 0.27 प्रतिशत गिरकर 101.75 पर आ गया। डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आने से रुपये सहित अन्य मुद्राओं को मजबूती हासिल करने का अवसर मिला। इसके अलावा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में गिरावट ने भी भारतीय मुद्रा को समर्थन दिया।
हालांकि, रुपये के सामने चुनौतियां भी बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 116.09 डॉलर प्रति बैरल बताई गई। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है। ऐसे में तेल की कीमतें ऊंची रहने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। तेल आयात के भुगतान के लिए अधिक डॉलर की जरूरत पड़ती है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव बन सकता है।
रुपये की मजबूती का आम लोगों पर क्या असर होगा?
डॉलर के मुकाबले रुपये की मजबूती का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। विदेश में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों और विदेश यात्रा की योजना बना रहे लोगों को इससे कुछ राहत मिलने की संभावना रहती है। रुपये के मजबूत होने पर डॉलर खरीदने के लिए पहले की तुलना में कम रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं। इससे विदेशी विश्वविद्यालयों की फीस, रहने और अन्य खर्चों का भुगतान करने वालों को फायदा मिल सकता है।
इसके अलावा, भारत में आयात होने वाले कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य सामान की लागत कम होने की संभावना भी रुपये की मजबूती से जुड़ी होती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रुपये में मामूली बढ़त होते ही पेट्रोल-डीजल या इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी। इन कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार, टैक्स, परिवहन और अन्य खर्चों का भी असर पड़ता है।
निर्यात करने वाली कंपनियों पर पड़ सकता है असर
रुपये की मजबूती का फायदा जहां आयात करने वालों को मिल सकता है, वहीं निर्यात करने वाली कुछ भारतीय कंपनियों के लिए इसका असर अलग हो सकता है। अमेरिका जैसे देशों में सामान और सेवाएं निर्यात करने वाली कंपनियों को डॉलर में भुगतान मिलता है। डॉलर की तुलना में रुपया मजबूत होने पर उस कमाई का रुपये में मूल्य घट सकता है।
फिलहाल रुपये की चाल पर डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेश के रुझान का असर बना हुआ है। आने वाले कारोबारी सत्रों में इन कारकों के आधार पर भारतीय मुद्रा की दिशा तय हो सकती है।